इंदौर. सोमवार रात करीब 1 बजे रहवासी क्षेत्र से घिरी कुलकर्णी का भट्टा स्थित फैक्टरी में आग लग गई। यह देखते ही देखते इतनी विकराल हो गई कि काबू पाना मुश्किल हो गया।
सुबह होते-होते फायर ब्रिगेड ने आग बुझाई, लेकिन थोड़ी ही देर में फिर शोले धधक उठे। दमकलकर्मी एक तरफ से आग बुझाते तो दूसरी तरफ भड़क जाती। यह सिलसिला मंगलवार शाम 5 बजे तक चलता रहा। इन 16 घंटों के दौरान आसपास रहने वाले 60 परिवारों के लोगों की जान सांसत में रही। उन्होंने ही फायर ब्रिगेड व पुलिस को सूचना दी व पूरे समय तपेले-बाल्टी लेकर छत पर डट गए और अपने आशियाने बचाने में जुटे रहे।
फैक्टरी मुंबई निवासी एसजी मुरारका की सीआईएल टेक्सटाइल प्राइवेट लिमिटेड है जिसमें विदेश से आई लकड़ी की फ्रेम, पेंटिंग, घोड़े के कंबल व कपड़ों की सिलाई का काम होता है। भारी मात्रा में पड़े कच्चे माल ने आग पकड़ी और करीब आधे घंटे में ही इतना विकराल रूप ले लिया कि पड़ोस की गुप्ताजी की बिल्डिंग में सो रहे रहवासियों को आंच लगने लगी।
गुप्ता बिल्डिंग के रहवासी किशोर गुप्ता दिनभर की थकान के बाद गहरी नींद में थे कि करीब 1.30 बजे कमरे में बढ़ी गर्मी से जाग गए। पंखा तेज करने पर भी राहत नहीं मिली तो गैलरी में पहुंचे। तभी सामने का मंजर देख उनकी रूह कांप उठी। बिल्डिंग से सटी फैक्टरी गगनचुंबी शोले उगल रही थी। इससे गैलरी की दीवारें और फर्श तक गरम हो रहा था। उन्हें एक पल तो लगा जैसे पूरी बिल्डिंग ही धराशायी हो जाएगी। फिर वे जोर-जोर से चिल्लाए तो 15 किराएदार भी जागे और ताबड़तोड़ बिल्डिंग खाली कर दी।
रहवासियों की सूचना पर परदेशीपुरा पुलिस व फायर ब्रिगेड पहुंची। आग की भीषणता देखते हुए फायर ब्रिगेड की छह गाड़ियां अलग-अलग दिशा से जुटीं। फैक्टरी में रखा सारा माल ज्वलनशील होने से दमकलकर्मियों को खासी मशक्कत करना पड़ी। एएसआई बलजीतसिंह हुड्डा ने फैक्टरी का शेड तोड़ने को कहा तो क्षेत्रीय नेताओं की मदद से जेसीबी मशीन से हटवाया और नए सिरे से आग पर काबू पाने की कोशिश हुई।
फैक्टरी की पिछली दीवार से सटे शंकरकुमार के बगीचे के 45 परिवार भी सहम गए। बबलू ठाकुर ने बताया बच्चे रोने लगे और महिलाएं गृहस्थी खाक होने के डर से चिल्ला-चिल्लाकर मदद के लिए पुकारने लगीं। उधर आग की लपटें खौफनाक रूप लेती जा रही थीं और दमकल अमला बेबस दिख रहा था। तब डरे-सहमे लोग एकजुट होकर बाल्टियां और तपेले लेकर अपने-अपने घरों की छत पर डट गए और दीवारें गीली कर आग को फैलने से रोक दिया।
रहवासियों का एक दल फैक्टरी के पास स्थित रूई के गोदाम को बचाने में भी जुटा जिससे आग उधर न फैले। दिलीप वर्मा ने बताया आग की लपटें डेढ़ किलोमीटर दूर तक देखी गईं। एएसआई शिवनारायण शर्मा ने बताया शाम 5 बजे तक आग पर काबू पा लिया गया था, लेकिन पूरी तरह बुझाने में कुछ घंटे और लगे। इसमें 50 से ज्यादा टैंकर पानी व करीब सात हजार लीटरफोम लगा।
शॉर्ट सर्किट से लगी आग -फायर ब्रिगेड मैनेजर का साफ इनकार
फायर ब्रिगेड ने आग लगने का कारण शॉर्ट सर्किट बताया जबकि फैक्टरी की मैनेजर कल्पना पति प्रमोद सोमानी ने कहा आग का कारण जो भी रहा हो पर शॉर्ट सर्किट नहीं हो सकता क्योंकि मैं खुद हर रात विद्युत प्रदाय पूरी तरह बंद कर जाती हूं। मेरे साथ पांच कर्मचारी टॉर्च लेकर चलते हैं और प्रत्येक पाइंट की एमसीबी गिराकर ही जाते हैं। इससे शॉर्ट सर्किट का तो सवाल ही नहीं उठता। हां, उन्होंने इसके पीछे किसी के षड्यंत्र की आशंका से भी इंकार नहीं किया।
पहले भी शॉर्ट सर्किट से लगी थी आग
उधर श्री गुप्ता ने बताया कुछ माह पहले भी इसी फैक्टरी में आग लगी थी, तब उन्होंने खुद शॉर्ट सर्किट होते देखा था। उस समय फायर ब्रिगेड ने मात्र दो टैंकर पानी से आग बुझा दी थी। इसके बाद रहवासियों ने श्रीमती सोमानी से फैक्टरी में 24 घंटे चौकीदार रखने का कहा था, ताकि फिर कोई हादसा नहीं हो।
24 घंटे चौकीदार भी नहीं रहता!
श्रीमती सोमानी ने बताया रात 12 बजे तक फैक्टरी में चौकीदार रहता है, लेकिन क्षेत्र में गुंडों का आतंक होने से रातभर रुकने के लिए कोई तैयार नहीं होता।
मंजर देख बदहवास हो गईं मैनेजर
श्रीमती सोमानी ने बताया वे पांच साल से फैक्टरी संभाल रही हैं। इससे उनके 160 कर्मचारियों की गुजर-बसर होती है। आंखों के सामने सबकुछ तबाह होते देख वे बदहवास हो गईं।