News
Chhattisgarh
Raipur Raipur रायपुर. राज्य में चुनाव की घोषणा का इंतजार सभी को था, लेकिन उम्मीद नहीं थी कि नवंबर के पहले पखवाड़े में ही मतदान होगा। चुनाव की तारीख देखकर टिकटार्थियों के होश उड़ गए हैं।
टिकट के सैकड़ों दावेदार हैं जिन्हें भरोसा था कि चुनाव नवंबर - दिसंबर में होंगे। चुनाव आयोग द्वारा छत्तीसगढ़ में 14 व 20 नवंबर को मतदान की तारीख तय की गई है। बस्तर, कांकेर, बीजापुर, दुर्ग, राजनांदगांव, कवर्धा, धमतरी, महासमुंद जिले की विधानसभा सीटों के दावेदार कुछ ज्यादा बेचैन हैं जहां पहले चरण में ही चुनाव होना है। यहां के प्रत्याशियों को 27 अक्टूबर तक नामांकन दाखिल करना है। हड़बड़ाए टिकटार्थियों की धड़कन इसीलिए बढ़ गई है। टिकट का फैसला नहीं होने की वजह से वे खुलकर प्रचार भी नहीं कर पा रहे हैं। कम समय में ज्यादा काम, कैसे होगा इसे लेकर चिंतित हैं।
विधायक भी असमंजस में
विधायकों की स्थिति भी डांवाडोल है। कुछ दिग्गजों को छोड़कर बाकी अभी टिकट पाने भाग - दौड़ कर रहे हैं। कांग्रेस ने अपने 34 में से 27 विधायकों को फिर से मैदान में उतारने के संकेत दे दिए हैं, लेकिन उन्हें भी प्रत्याशी घोषित नहीं किया गया है। नेता प्रतिपक्ष महेन्द्र कर्मा, भूपेश बघेल, नंदकुमार पटेल, सत्यनारायण शर्मा, रविन्द्र चौबे, रामचंद सिंहदेव, महंत रामसुंदर, रामपुकार सिंह, मोहम्मद अकबर, योगीराज सिंह, धर्मजीत सिंह, धनेन्द्र साहू ने अपनी ओर से तैयारियां शुरु भी कर दी हैं।
गणोश शंकर बाजपेयी, चैतराम साहू,डा. शिव डहरिया, डा. हरिदास भारद्वाज, ताम्रध्वज साहू, डा. चेतन वर्मा, गुलाब सिंह, राजेन्द्र पामभोई, अमरजीत भगत, डा. शक्राजीत नायक अभी भी दिल्ली दौड़ लगा रहे हैं। भाजपा में टिकट कटने की खबरों से कुछ मंत्रियों और करीब एक दर्जन विधायकों की नींद उड़ी हुई है। वे सत्ता व संगठन के प्रमुखों को मनाने में लगे हैं। मुख्यमंत्री डा. रमन सिंह कहां से चुनाव लड़ेंगे यह भी तय नहीं है।
उनके सहयोगी मंत्रियों बृजमोहन अग्रवाल, राजेश मूणत, रामविचार नेताम, लता उसेंडी, अमर अग्रवाल,सत्यानंद राठिया के अलावा विधानसभा अध्यक्ष प्रेमप्रकाश पांडे को पार्टी हरीझंडी दिखा चुकी है। हेमचंद यादव, गणोश राम भगत, मेघाराम साहू,ननकीराम कंवर के मामले में फैसला नहीं हो सका है। टिकट के दावेदारों को उम्मीद है कि पहले चरण में जहां चुनाव होना है वहां के प्रत्याशियों की सूची जल्द ही जारी कर दी जाएगी।
बेचैनी की वजह
टिकट के दावेदारों में बेचैनी स्वाभाविक है। कई दावेदारों ने माह भर पहले से अपना प्रचार अभियान शुरु कर दिया है। होर्डिग्ंस व बैनर, पोस्टर व दीवारों पर नाम और नारे तक लिखवा दिए हैं।
कुछ तो वार्डो में बैठकें भी ले चुके हैं। गणोशोत्सव और फिर नवरात्रि में कार्यक्रमों के लिए फाइनेंस कर चुके हैं। परिसीमन के बाद अधिकांश विधानसभा क्षेत्रों में बदलाव आया है। वहां के राजनीतिक समीकरण को समझने और अपनी पैठ बनाने मेहनत करनी होगी। समय बेहद कम है ऐसी स्थिति में पार्टी के नाराज नेताओं, कार्यकर्ताओं को एकजुट करना सबसे बड़ी चुनौती है। हर विधानसभा क्षेत्र में औसतन दो लाख मतदाता हैं, इन तक पहुंचना भी इतने कम समय में आसान नहीं है।
क्या कहते हैं दावेदार
कांग्रेस के कुलदीप जुनेजा चुनाव की तारीख को लेकर थोड़े परेशान नजर आए। हाव-भाव से उनकी परेशानी नजर नहीं आई, लेकिन बातचीत मे चिंता जरूर झलकी। उन्होंने कहा, समय कम है, जिसका बेहतर उपयोग करना होगा। कार्यकर्ताओं की टीम तैयार कर घर-घर दस्तक देनी होगी। कांग्रेस के ही रमेश वल्र्यानी भले ही पार्टी को चुनाव के लिए तैयार मान रहे हो, लेकिन कम समय ने उनकी भी धड़कन बढ़ा दी है। उनका कहना है, दिसंबर में चुनाव होने की उम्मीद थी। चुनाव कार्यालय के लिए भवन तलाशने और प्रचार सामग्री तैयार करने में दिक्कतें आएंगी।
भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष विष्णुदेव साय ने माना कि पार्टी को नवंबर के अंतिम सप्ताह में चुनाव की उम्मीद थी। उन्होंने कहा कि अब चुनाव की तैयारी तेज करनी होगी। भाजपा में प्रत्याशी नहीं बल्कि संगठन चुनाव लड़ता है, इसीलिए प्रत्याशियों को कोई दिक्कत नहीं होगी। भारतीय जनता युवा मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष व दावेदार संजय श्रीवास्तव ने कहा कि चुनाव में जल्दबाजी जरुर हुई है फिर भी जनता के बीच काम करने वालों को कोई दिक्कत नहीं होनी चाहिए। पार्टी स्तर पर तैयारी तो काफी पहले ही शुरु हो चुकी है। जो लोग चुनाव के वक्त ही जनता के पास जाते हैं उन्हें परेशानी तो होगी ही।