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Madhya Pradesh
Gwalior Gwalior ग्वालियर. राज्य में विधानसभा चुनाव कार्यक्रम घोषित होने के एक घंटे बाद ही जिला प्रशासन ने निगम, मण्डल व स्थानीय निकायों के पदाधिकारियों से लाल-पीली बत्ती लगे सरकारी वाहन वापस मांग लिए हैं। उल्लेखनीय है कि जिले में लगभग डेढ़ दर्जन अशासकीय सदस्यों को राज्य शासन की ओर से सरकारी वाहन सुविधा दी गई है।
एडीएम कार्यालय से मिली जानकारी के अनुसार, ग्वालियर विकास प्राधिकरण, साडा, नगर निगम, मण्डी समिति, सहकारी व भूमि विकास बैंक तथा नगर पालिका आदि में अशासकीय सदस्यों, महापौर, अध्यक्ष व सभापति द्वारा उपयोग किए जा रहे वाहन मंगलवार को ही वापस मांग लिए गए। ऐसा न करने वालों पर आदर्श आचरण संहिता के उल्लंघन की कार्रवाई की जाएगी। निर्वाचन कार्यालय ने अशासकीय पदाधिकारियों को मिली स्टाफ की सुविधा भी वापस लेने का निर्देश दिया है। उल्लेखनीय है कि अशासकीय पदाधिकारियों को कामकाज के लिए जिला कार्यालय या अन्य किसी विभाग से अधिकारी या लिपिकीय अमला उपलब्ध कराया जाता है।
मंत्रियों पर भी असर: आचार संहिता जारी होने के बाद अब जिले के भ्रमण पर आने वाले राज्य शासन के स्थानीय मंत्री भी सरकारी वाहनों का उपयोग नहीं कर सकेंगे। निर्वाचन कार्यालय के अनुसार, मंत्री व अन्य को जिले के दौरे के समय केवल वाहनयुक्त सुरक्षा ही उपलब्ध हो सकेगी। इसी तरह नामांकन प्रक्रिया प्रारंभ होने से पहले यदि किसी दल का बड़ा नेता शहर के भ्रमण पर आता है तो उसकी अगवानी पर होने वाला खर्च चुनावी मद में पार्टी खाते में दर्ज होगा जबकि नामांकन फार्म जमा होने के बाद यह खर्च प्रत्याशी के खाते में शामिल माना जाएगा।