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कमांडेंट के गार्ड ने गोली मारकर खुदकुशी की

भिंड. विशेष सशस्त्र बल 17 वीं वाहिनी के आरक्षक उम्मेद सिंह भदौरिया ने सोमवार-मंगलवार की दरम्यानी रात गोली मारकर खुदकुशी कर ली। आरक्षक की लाश मंगलवार को तड़के गार्डरूम में पड़ी मिली। घटनास्थल पर पुलिस को खाकी लिफाफे में तीन पत्र भी मिले हैं। इन पत्रों को पुलिस ने जांच में ले लिया है। पत्र में भाजपा नेता एवं जिला सहकारी केन्द्रीय बैंक के चेयरमैन श्यामसुन्दर सिंह जादौन का नाम आने से पुलिस के लिए परेशानी खड़ी हो गई है।

अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक विजय खत्री ने बताया कि मंगलवार की सुबह बटालियन परिसर में तैनात गार्ड राजकुमार पचौरी के जरिए सूचना मिली थी कि गार्ड उम्मेद सिंह भदौरिया (50)पुत्र बालस्टर सिंह भदौरिया निवासी ग्राम मसूरी हाल अशोक नगर अटेर रोड की खून से लथपथ लाश बटालियन परिसर में स्थित गार्ड रूम में पड़ी है। इस सूचना पर पुलिस अधीक्षक अभय सिंह, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक विजय खत्री, सीएसपी धर्मेन्द्र सिंह छाबई, टीआई कोतवाली एवं देहात दोनों भी मौके पर पहुंचे।

कमाडेंट के बंगले के पीछे बने गार्ड रूम में उम्मेद सिंह भदौरिया की लाश फर्श पर पड़ी थी। लाश के नीचे थ्री नाट थ्री की राइफल पड़ी थी। गोली उसके सिर में लगी थी और खून के धब्बे कमरे में चारों और फैले हुए थे। घटनास्थल पर ही पलंग पर पुलिस को तीन अलग-अलग लिफाफों में पत्र मिले। इनमें एक पत्र पुलिस अधीक्षक अभय सिंह, एक पत्र कमांडेट अनिल गुप्ता तथा एक पत्र पूर्व मंत्री डा.गोविंद सिंह के नाम लिखा हुआ है। तीनों पत्रों को पुलिस अधीक्षक ने पड़ताल में ले लिया। बाद में यह पत्र पुलिस अधिकारियों ने मृतक के परिजनों के सुपुर्द भी किए। सहायक सेनानी रेखा सिंह का कहना है कि गार्ड उत्तम सिंह धाकड़ को उम्मेद सिंह के कमरे में मौजूद होना चाहिए था,लेकिन वे अपने घर चले गए थे, इसलिए उनके खिलाफ निलंबन की कार्रवाई की जाएगी।

इस तरह घटित हुआ घटनाक्रम
किसी दूसरी कंपनी से अटैच होकर आए उम्मेद सिंह भदौरिया को कल पहली बार गार्ड डच्यूटी पर लगाया गया था। उनकी डच्यूटी का समय रात 9 बजे से 11.30 बजे तक था। उन्होंने चार्ज उत्तम सिंह धाकड़ से लिया। श्री धाकड़ ड्यूटी खत्म होने के बाद खाना खाने शहर में ही अपनी बहन के घर चले गए थे। रात 11.30 बजे उम्मेद सिंह को डच्यूटी राजकुमार पचौरी को सुपुर्द करना थी,उसके बाद रामऔतार का नंबर आना था। रात 3.30 बजे करीब जब रामऔतार की आंख खुली तो उसने राजकुमार पचौरी को टटोला। तब राजकुमार भी सोते हुए मिले। बाद में राजकुमार और रामऔतार ने जहां गार्ड डच्यूटी जहां रहती हैं वहां देखा तो कोई नहीं मिला। बाद में इन दोनों ने गार्ड रूम में आकर देखा तो उम्मेद सिंह की लाश पड़ी मिली। यह बात रात 3.30 बजे की है। इस पूरे घटनाक्रम के दौरान यह बात साफ नहीं हो पाई है कि उम्मेद सिंह ने आखिर गोली किस वक्त मारी। उसके बाद समूचे बटालियन परिसर में घटना की जानकारी आग की तरह फैल गई।

भाजपा नेता जादौन को लपेटे में लिया पत्र में
मृतक उम्मेद सिंह भदौरिया के पलंग पर पड़े मिले पत्रों में लिखने वाले ने सेवा सहकारी संस्था बगुलरी के चुनाव का जिक्र किया है। जिसमें लिखा गया है कि बगुलरी संस्था का अध्यक्ष उसके चचेरे भाई रविन्द्र सिंह भदौरिया को चुना गया था। हालांकि बाद में बैंक के चेयरमैन श्यामसुन्दर सिंह जादौन ने रविन्द्र सिंह को हटवाकर संस्था की उपाध्यक्ष उर्मिला सिंह को कार्यवाहक अध्यक्ष बनवा दिया। इस मामले को लेकर पत्र में लिखा गया है कि श्री जादौन ने रविन्द्र सिंह को पुन: बहाल करने के लिए एक लाख रुपए लिए थे। बाद में न तो उसे बहाल किया गया और न ही पैसे वापस किए। पैसे मांगने पर उसे डराने और धमकाने का भी काम किया गया। पत्र में श्री जादौन के अलावा उर्मिला सिंह पत्नी शेर सिंह, सचिव उमाशंकर शर्मा, श्री लाल तथा कुलदीप सिंह के नाम का भी जिक्र किया गया है।

इस पत्र को लेकर पुलिस अधीक्षक अभय सिंह का कहना है कि पत्र की हैंड राइटिंग एक्सपर्ट से जांच कराने के उपरांत यह देखा जाएगा कि पत्र में उल्लखित नामों में किसके द्वारा किस स्तर का अपराध किया गया है। उनका कहना है कि किसी भी अपराधी को बख्शा नहीं जाएगा। जिला सहकारी केन्द्रीय बैंक के चेयरमैन एवं भाजपा नेता श्यामसुन्दर सिंह जादौन ने उक्त घटनाक्रम से अपना पल्ला झाड़ लिया है। उनका कहना है कि उम्मेद सिंह ने खुदकुशी क्यों की यह पुलिस के लिए जांच का विषय हो सकती है लेकिन उनका उक्त घटना से कोई लेना-देना नहीं है। उनका कहना है कि न तो उन्होंने पैसे लिए थे और न ही उनके द्वारा किसी को डराने-धमकाने का काम किया गया।





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