नई दिल्ली. अमेरिका की दो हेलीकाप्टर निर्माता कंपनियां लड़ाकू हेलीकाप्टरों के लिए भारतीय वायुसेना की निविदा प्रक्रिया से हट गई हैं। उनके हटने से निविदा प्रक्रिया में छह वैश्विक कंपनियों को शामिल करने के भारत के प्रयास को झटका लगा है।
रक्षा मंत्रालय के एक अधिकारी ने बुधवार को बताया कि अमेरिकी कंपनी बोइंग और बेल ने विभिन्न कारणों से अपनी निविदाएं प्रस्तुत करने से इनकार कर दिया है।
मई में जारी हुआ था टेंडर :
भारत ने 22 लड़ाकू हेलीकाप्टरों की खरीद के लिए इस साल मई में टेंडर (सैन्य भाषा में रिक्वेस्ट फॉर प्रपोजल-आरएफपी) जारी किए थे। टेंडर में छह वैश्विक कंपनियों को तीन महीने के भीतर अपनी निविदाएं प्रस्तुत करने के लिए कहा गया था।
इसलिए पीछे हटी कंपनियां :
बोइंग ने शुरुआत में रुचि दिखाई थी। मगर वायुसेना के आरएफपी की समीक्षा करने के बाद कंपनी को लगा कि वह टेंडर में दी गई समयसीमा के भीतर ऐसा ठोस प्रस्ताव तैयार नहीं कर पाएगी, जो भारत की जरूरतों को पूरा कर सके। दूसरी ओर बेल कंपनी ने उस वक्त अपने कदम वापस ले लिए, जब उसे पता चला कि उसके ‘एएच-1जेड कोबरा’ लड़ाकू हेलीकाप्टरों का निर्यात केवल विदेशी सैन्य बिक्री मार्ग से हो सकता है। भारत ने आरएफपी में कहा था कि वह हेलीकाप्टरों को सीधे कंपनी से लेगा, न कि सरकारी मार्ग से।
अब केवल चार कंपनियां :
निविदा जमा करने की अंतिम तारीख समाप्त हो जाने के बाद अब चार कंपनियों के प्रस्तावों पर विचार हो रहा है। इनमें रूस की दो कंपनियां कैमोव एवं मिल, इटली-ब्रिटेन की अगस्ता वेस्टलैंड और फ्रांस की यूरोकाप्टर शामिल हैं। कैमोव ने अपने ‘केए-50’ हेलीकाप्टर, मिल ने ‘एमआई-28’, अगस्ता वेस्टलैंड ने ‘एडब्ल्यू 129’ और यूरोकाप्टर ने ‘टाइगर’ हेलीकाप्टर के लिए निविदा पेश की है।