News
Madhya Pradesh
Gwalior Gwalior शिवपुरी. जिले के शासकीय विद्यालयों में अध्ययनरत नौनिहालों को मिड डे मील प्रदाय करने के लिए आया करीब एक हजार क्विंटल गेहूं नागरिक आपूर्ति निगम और विपणन सहकारी संस्थाओं के अधिकारी, कर्मचारियों ने खुर्दबुर्द कर दिया है।
तीन माह पूर्व हुए इस गड़बड़झाले की परतें अब खुलती जा रही हैं। इस घोटाले में आपूर्ति निगम के वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल बताए जा रहे हैं। यही वजह है कि तीन माह में इस घोटाले में किसी भी अधिकारी के खिलाफ पुलिस प्राथमिकी दर्ज नहीं कराई गई है।
जिला पंचायत द्वारा शासकीय विद्यालयों में मध्याह्न् भोजन के लिए नि:शुल्क खाद्यान्न (गेहूं) हर माह मांग अनुसार जिला आपूर्ति निगम को प्रदाय किया जाता है। आपूर्ति निगम से यह खाद्यान्न ब्लाक में कार्यरत विपणन सहकारी संस्थाओं को दिया जाता है और इन संस्थाओं से यह खाद्यान्न उचित मूल्य की दुकान तक पहुंचता है, जहां से स्व-सहायता समूह और विद्यालयों के पालक शिक्षक संघ इस खाद्यान्न का उठाव करते हैं, पर करैरा और नरवर में इस चेन को तोड़कर कुछ अधिकारी, कर्मचारियों ने बच्चों के हिस्से का ही एक हजार क्विंटल खाद्यान्न गायब कर दिया है।
सूत्रों के मुताबिक, जिला आपूर्ति निगम द्वारा विपणन सहकारी संस्था करैरा को तीन माह पूर्व 700 क्विंटल खाद्यान्न अतिरिक्त दे दिया। जबकि ब्लाक में इसकी जरूरत ही नहीं थी। इसी प्रकार नरवर की नल दमयंती विपणन सहकारी संस्था को 300 क्विंटल खाद्यान्न अतिरिक्त दे दिया गया।
इस माह जब एक हजार क्विंटल खाद्यान्न का हिसाब मिलाया गया तो मामला खुला और पता चला कि दोनों संस्थाओं ने इस खाद्यान्न के वितरण का कोई ब्यौरा प्रस्तुत नहीं किया है। इस पूरे मामले में आपूर्ति निगम के लिपिक आरसी तिवारी, दिनेश सेन, करैरा की विपणन सहकारी संस्था के खाद्यान्न प्रभारी नौसे खान, मुन्ना खान और नरवर की नल दमयंती संस्था के खाद्यान्न प्रभारी मधुर मिलन दुबे की भूमिका पर सवाल खड़े हो गए हैं।
सूत्रों के अनुसार इस मामले का खुलासा होने के बाद अपने हाथ पैर बचाने के लिए आपूर्ति निगम के प्रबंधक प्रेम सिंह यादव ने कलेक्टर मनीष श्रीवास्तव को इस हेतु एक प्रतिवेदन भेजा है। इस प्रतिवेदन के आधार पर कलेक्टर ने श्री यादव को कारण बताओ नोटिस जारी करने के साथ ही इस मामले में लिप्त सभी दोषी कर्मचारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने की बात कही है।
इधर इस पूरे गड़बड़झाले पर जिला आपूर्ति निगम के प्रबंधक प्रेम सिंह यादव ने कहा कि एक हजार क्विंटल खाद्यान्न का हिसाब नहीं मिल रहा है और हमारे विभाग के निचले कर्मचारियों की गड़बड़ी सामने आ रही है। इस मामले की जांच की जा रही है और इसके दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है।
नौ लाख है खुदबुर्द किया गया खाद्यान्न
जिला आपूर्ति निगम के कर्मचारियों द्वारा करैरा और नरवर की सहकारी संस्थाओं के साथ मिलकर खुर्दबुर्द किए गए एक हजार क्विंटल गेहूं का बाजार मूल्य करीब नौ लाख आंका जा रहा है। हालांकि उक्त खाद्यान्न नि:शुल्क विद्यालयों को दिया जाता है, लेकिन बाजार में उक्त गेहूं की प्रति किग्रा मूल्य नौ रुपए है। इस लिहाज से गणना करें तो एक हजार क्विंटल गेहूं नौ लाख का हो रहा है और इतनी बड़ी राशि के गोलमाल के बाद भी इस मामले पर सख्त कार्रवाई नहीं की गई है। इससे जिला खाद्य विभाग ही नहीं मध्याह्न् भोजन शाखा के अधिकारी भी संदेह के घेरे में आ गए हैं।