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International International हैम्स्टीड (लांग आइलैंड). बराक ओबामा ने अपना सेलफोन स्विच ऑफ कर दिया। जॉन मैक्केन ने समर्थकों की बजाय विशेषज्ञ बुलाए। डेमोक्रेटिक पार्टी के 47 वर्षीय अश्वेत उम्मीदवार ने ओहियो के एक रिसोर्ट में संभावित सवालों के जवाब तैयार किए। विरोधी 76 वर्षीय तपे हुए गौरवर्ण के रिपब्लिकन उम्मीदवार ने न्यूयॉर्क में तैयारियां कीं।
मौका तो दोनों के लिए आखिरी है- लेकिन भारी बढ़त के चारों दिशाओं से आ रहे रुझानों ने युवा प्रत्याशी को भरोसे के पहाड़ पर खड़ा कर दिया है। इसलिए समूचा अमेरिका चाहता है कि परिणामों के बारे में ज्यादा न सोचते हुए बुजुर्ग नेता ‘बदलाव की बयार’ की बात करे। यानी पार्टी वही बुश की- नीतियां नई- मैक्केन की। आर्थिक संकट ने यूं भी सबकुछ बदल दिया है। इसीलिए दुनियाभर के लोगों की दिलचस्पी और अमेरिकी वोटरों को इंतजार है तीसरी और अंतिम राष्ट्रपति चुनाव बहस का- जो यहां न्यूयॉर्क के पास होफस्ट्रा यूनिवर्सिटी में रात 9.30 बजे शुरू होगी।
यूं तो 90 मिनट के इस शास्त्रार्थ में एक ही मेज पर आमने-सामने बैठने वाले दोनों उम्मीदवारों ने अपने घोषणापत्र बना ही रखे हैं- फिर भी सबका मानना है कि जहां मैक्केन को एक-एक शब्द इसलिए वजनदार बोलना होगा क्योंकि अमेरिकी जनता के सामने उनकी नकारात्मक छवि बन चुकी है। वहीं ओबामा को हर वाक्य इसलिए तौल कर बोलना होगा- कि कहीं गलती न हो जाए।
जब वो मेट
ओबामा-मैक्केन में आमने-सामने : खुली बहस
1. पहली बहस 26 सितंबर को, मिसिसिपी में मैक्केन भारी रहे : विदेश नीति पर।
पिछड़े: आर्थिक संकट पर।
ओबामा भारी रहे : मंदी से उबरने के लिए क्या करेंगे- खूब बताया।
पिछड़े: विरोधी के अनुभव के किस्सों में।
रुझान- सीएनएन में ओबामा को 51 फीसदी लीड दी गई। विरोध में 38 प्रतिशत।
खास बात: मैक्केन ने ओबामा की खिल्ली भी उड़ाई-आंखें मिलाईं तक नहीं।
2. दूसरी बहस
7 अक्टूबर को नैसेविल टेनेजी में मैक्केन भारी रहे: मंदी से उबरने के लिए मशहूर पूंजीपति वॉरने बफेट को आगामी वित्त मंत्री बनाने के ओबामा के सुझाव पर खुली सहमति देकर कद ऊंचा किया।
पिछड़े: लेकिन संबोधन में गरिमा नहीं रखी।
ओबामा भारी रहे: खुले दिल से बोले। ‘जॉन’ कहकर आत्मीयता दिखाई।
खास बात: सारे सवाल आर्थिक संकट पर टिक गए
रुझान: ओबामा 54 प्रतिशत मैक्केन 30 प्रतिशत
3. अब तीसरी (निर्णायक ) बहस आज, हैम्स्टीड. न्यूयॉर्क में बहस से एक दिन पहले के रुझान :
ओबामा: 49.9 फीसदी- (इलेक्टोरल कॉलेज के 313 वोटों की बढ़त )
मैक्केन: 42 फीसदी- सिर्फ 158 पर रुक गए।
- बाजी उलटने का मैक्केन के पास अंतिम मौका
पसीना न आ जाए..इसलिए..
होफस्ट्रा विश्वविद्यालय इस पूरे आयोजन को लेकर पसीना-पसीना हो रहा है- क्योंकि 2 लाख डॉलर की बजाय उसे साढ़े तीन लाख डॉलर खर्च करने पड़े हैं। लेकिन रोचक तो यह है कि दोनों उम्मीदवारों ने मंच पर एयरकंडीशनिंग की समुचित व्यवस्था चाही थी-ताकि पसीने न छूटें। ऐसा इसलिए किया गया है क्योंकि 1960 में कैनेडी-निक्सन के शास्त्रार्थ के दौरान पसीने से लथपथ निक्सन की छवि को गहरा धक्का पहुंचा था।