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कम बरसा, कंठ तरसा

भोपाल. watr इस वर्ष प्रदेश में मानसून बेशक समय पर आया मगर वह अल्पकालीन जिससे न तो भूजलस्तर बढ़ सका न ही जलस्त्रोतों में भरपूर पानी जमा हो सका। इससे पानी के संकट के हालात अक्टूबर में ही निर्मित हो गए हैं।

छिंदवाड़ा: इस वर्ष औसत से 40 प्रतिशत कम बारिश हुई है। कृषि विशेषज्ञ विजय पराडकर ने बताया कि कम बारिश का प्रभाव सोयाबीन पर लगभग 25 प्रतिशत और मक्का पर 10 से 20 प्रतिशत पड़ा है। यदि अब बारिश नहीं होती है तो रबी फसल का रकबा घटेगा। कोयलांचल के क्षेत्रों में तीन से पांच दिन के अंतराल में पेयजल आपूर्ति की जा रही है। बैतूल के पास सांपना, कोसमी, मुलताई के चंदोरा, आठनेर के बाकुड़ और भैंसदेही के कुर्सी आदि बड़े जलाशय खाली हैं। रबी फसल की तैयारी के लिए किसान बूंद-बूंद पानी को मोहताज हो रहे हैं। माचना, ताप्ती, देनवा, तवा आदि नदियां खाली हैं, जिनके पास स्वयं के ट्यूबवेल या अन्य सिंचाई के साधन हैं, वे ही समय पर रबी फसलों की बोवनी कर सकेंगे।

विदिशा: कम बारिश होने से हलाली डेम खाली रह गया है। जिस कारण करीब 25 हजार हैक्टेयर क्षेत्र के किसानों को सिंचाई के लिए पानी इस बार नहीं मिल पाएगा। कम बारिश से रबी की फसल का रकबा घट गया है। सिंचाई वाली फसलों के लिए पानी मिलना इस बार मुश्किल रहेगा। रायसेन में 1327.6 मिमी औसत वर्षा होती है, जबकि इस साल 913.4 मिमी वर्षा ही हुई है।

होशंगाबाद जिले में बारिश कम हुई है। जिले की औसत बारिश 1311 मिमी है जबकि इस वर्ष 832 मिमी बारिश ही हो सकी है। दो वर्षो से जिले में औसत बारिश भी नहीं हो पा रही है। इसी प्रकार हरदा जिले में बारिश कम होने से लोगों की चिंता बढ़ गई है। हरदा जिले में इस वर्ष 713 मिमी बारिश हुई है। पिछले वर्ष 1200 मिमी बारिश हुई थी।

सीहोर: इस साल जिले में बहुत कम बारिश हुई। इस कारण जहां पीने के पानी की किल्लत अभी से होने लगी है, वहीं दूसरी ओर खेती पर भी इसका असर पड़ेगा। जिले की औसत वर्षा 1261.2 मिमी है, जबकि इस साल जिले में 730.2 मिमी वर्षा ही हो सकी है। सीहोर नगर में चार दिन छोड़कर पानी सप्लाई किया जा रहा है। वहीं कम बारिश के कारण इस साल रबी फसल की बोवनी का रकबा भी कम होगा। डिप्टी डायरेक्टर एनएस रघु ने बताया कि पूर्व में जिले में रबी फसल की बोवनी के लिए 2 लाख 57 हजार हैक्टेयर क्षेत्र रकबा निर्धारित किया गया था, लेकिन अल्प वर्षा की स्थिति को देखते हुए अब 2 लाख 43 हजार हैक्टेयर क्षेत्र का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

राजगढ़: जिले में इस वर्ष औसत से ४१८ मिमी बारिश कम हुई है। औसत बरसात 1100.7 मिमी है। इस वर्ष कम हुई बारिश के चलते आने वाली रबी सीजन की फसल को लेकर किसानों में चिंता बढ़ र्गई है। कृषि विभाग से मिली जानकारी के अनुसार जिले में पिछले वर्ष करीब १ लाख ७५ हजार हैक्टेयर में रबी की बोवनी की गई थी और जिले में 802.5 मिमी वर्षा दर्ज की गई थी। इस वर्ष ६८२.7 मिमी वर्षा होने के कारण कई किसान गेहूं, चना आदि की फसल की बोवनी नहीं कर पाएंगे।

तालाबों में बहुत कम पानी एकत्र हो सका है। जिले की सीमा में बहने वाली नदियां नेवज, पार्वती, अजनार और दूधी में इस वर्ष अभी से ही पानी की कमी बनी हुई है।

गुना, अशोकनगर में नहीं चिंता की बात: गुना जिले में यूं तो औसत से कम बारिश हुई है, मगर पिछले वर्ष की तुलना में अधिक बारिश होने से किसानों की बांछे खिली हुई है। बीते वर्ष की तुलना में इस बार २५७ मिमी अधिक बारिश हुई है। जिले की औसत बारिश 1043 मिमी है और इस वर्ष 978.5 मिमी बारिश हुई है। बीते वर्ष ७२१.३८ मिमी वारिश हुई थी अच्छी बारिश को देखते हुए कृषि विभाग ने बीते वर्ष की तुलना में बोवनी के लिए एक लाख हेक्टेयर अधिक का रकवा बढ़ा दिया है।

बीते वर्ष १ लाख ५५ हजार २३४ हेक्टेयर में रबी की बोवनी हुई थी। जबकि इस वर्ष २ लाख 50 हजार से भी अधिक का लक्ष्य रखा गया है। वहीं अशोकनगर में इस वर्ष औसत बारिश से अधिक बारिश हुई है। जिले की औसत बारिश 800 मिमी है और इस वर्ष 1243.9 मिमी बारिश हुई है, जिससे जिले में आमउपयोग व खेती के लिए पानी की कमी नहीं पड़ेगी। इसके अलावा 2 लाख 85 हजार हेक्टेयर के रकबे में बोवनी की जाएगी।





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