संपादकीय. भारतीय अंग्रेजी लेखक अरविंद अडिगा के पहले उपन्यास ‘द व्हाइट टाइगर’ को विश्व साहित्य के सर्वाधिक प्रतिष्ठित पुरस्कारों में से एक मैन बुकर पुरस्कार 2008 का मिलना भारतीय अंग्रेजी साहित्य ही नहीं, समूचे भारतीय साहित्य के लिए गौरव की बात है।
यह पुरस्कार एक बार फिर इस बात का प्रमाण है कि भारत में कभी पराई माने जाने वाली भाषा अंग्रेजी में लगातार न सिर्फ नए लेखक उभर रहे हैं, बल्कि अपने अचूक प्रयोगों और कल्पनाशीलता से विश्व परिदृश्य पर कीर्तिमान कायम कर रहे हैं। सलमान रुश्दी, अरुंधति रॉय और किरण देसाई के बाद अडिगा भारत में जन्मे चौथे लेखक हैं जिन्हें बुकर पुरस्कार प्राप्त हुआ है।
इस पुरस्कार के लिए नामांकित होने वाले भारत के और भारत से जुड़े लेखकों की तो अब लंबी फेहरिस्त बनाई जा सकती है। इसी वर्ष दो भारतीय लेखकों की कृतियां बुकर के लिए नामांकित हुई थीं, जिनमें अडिगा की अपेक्षा कहीं ज्यादा जाने-माने अमिताव घोष का उपन्यास ‘सी ऑफ पॉपीज’ भी था। आम तौर पर अनुमान भी यही लगाया जा रहा था कि किसी भारतीय लेखक को इस साल यह पुरस्कार मिला तो वह संभवत: अमिताव घोष होंगे। लेकिन पहले ही उपन्यास के साथ अडिगा की सफलता बताती है कि साहित्य में नए प्रयोगों का साहस ही रचना को मूल्यवान बनाता है।
अडिगा को यह पुरस्कार ऐसे समय मिला है जब विश्व पूंजीवाद और उसके साथ ही भारत की आर्थिक समृद्धि की संभावनाओं पर संशय के बादल मंडरा रहे हैं। ‘द व्हाइट टाइगर’ भारतीय जनजीवन के उस अंधकार को अपना विषय बनाता है, जो नवजात आर्थिक चकाचौंध के नीचे हमेशा से मौजूद रहा है। कहानी का नायक बलराम हलवाई बिहार के एक गरीब रिक्शा चालक का बेटा है जो परिस्थिति के थपेड़ों से दिल्ली आ जाता है।
यहां ड्राइवरी करते हुए वह अपने मालिक का कत्ल करता है और फिर बेंगलुरू पहुंचकर व्यवसायी बन जाता है। एक रात चीनी प्रधानमंत्री के आगमन की खबर सुनकर वह उनके नाम सात पत्रों में अपनी कहानी लिखता है और इन्हीं सात पत्रों से उपन्यास का शिल्प गढ़ा गया है।
अडिगा ने कथानक के रूप में भारतीय यथार्थ के जिस ऊबड़-खाबड़ हिस्से का चयन किया है, वह विदेशी पाठकों के लिए खास तौर पर चौंकाने वाला होगा। बुकर की निर्णायक समिति ने ठीक ही कहा है कि ‘द व्हाइट टाइगर’ का नायक खलनायक होते हुए भी पाठक के मन में घृणा पैदा नहीं करता, बल्कि मिले-जुले जटिल भावों का सृजन करता है। बुकर की जीत के बाद अडिगा की कलम से और भी अच्छी कृतियों की उम्मीद की जा सकती है।