भोपाल.
मौलाना आजाद राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (मैनिट) के छात्र राहुल पाठक की आत्महत्या के बाद अब अनेक सवाल उठने लगे हैं। संस्थान के प्रबंधन की कार्यप्रणाली संदेह के घेरे में आ गई हैं। क्योंकि अनेक विद्यार्थियों का आरोप है कि मैनिट में चल रही राजनीतिक गतिविधियों में सहयोग न करने के कारण राहुल को झूठे आरोप में फंसाया गया, जिससे उसने आत्महत्या कर ली। मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी ने इस घटना की जांच कर रिपोर्ट देने को कहा है।
इस घटना के बाद मैनिट के गेट पर धरने और नारेबाजी का सिलसिला करीब सात घंटे तक चलता रहा। खबर लिखे जाने तक विद्यार्थी वही डटे हुए थे। वे दो तरह के आरोप लगा रहे हैं, पहला यह कि संस्थान के डायरेक्टर प्रो. केएस पांडेय ने राहुल को रैगिंग प्रकरण पर बुरी तरह धमकाया, जिससे डरकर उसने आत्महत्या कर ली।
मैनिट के विद्यार्थियों का गुस्सा बेकाबू नजर आया। वे कभी डायरेक्टर के इस्तीफे की मांग के लिए नारेबाजी कर रहे थे तो कभी आक्रामक मुद्रा में वहां के स्टाफ को मारने के लिए भी आगे बढ़े। आलम यह था कि संस्थान की सिक्युरिटी भी विद्यार्थियों को काबू में नहीं रख पा रही थी और पुलिस ने बमुश्किल उन्हें हिंसा करने से रोका। हालांकि संस्थान के अध्यक्ष एएन सिंह ने कई बार उन्हें शांत रहने को कहा, उन्होंने बैठ कर बातचीत की पेशकश भी की, लेकिन विद्यार्थियों ने श्री सिंह से ही गालीगलौच कर दी।
भास्कर संवाददाता की मौजूदगी में कई विद्यार्थियों ने आरोप लगाया कि एक राजनीतिक दल को चुनाव में मदद करने के लिए यहां के विद्यार्थियों के करीब तीन हजार फर्जी मतदाता परिचय पत्र तैयार कराए गए हैं। चूंकि राहुल इस मुहिम में साथ नहीं दे रहा था, इसलिए उसे रैगिंग के झूठे मामले में फंसा दिया गया। विद्यार्थी अपने दावे की पुष्टि के लिए ऐसे एक परिचय पत्र की कॉपी भी दिखाई, जिसमें मतदाता के पिता के नाम की जगह ‘मालूम नहीं’ लिखा है।
उनका आरोप यह भी है कि उक्त राजनीतिक दल के लोग आए दिन संस्थान के हॉस्टल में आ कर विद्यार्थियों को धमकाते हैं। राज्य के मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी जेएस माथुर ने भास्कर को बताया कि मीडिया के जरिए उन्हें भी फर्जी परिचय पत्र की जानकारी मिली है।
जिसके लिए उन्होंने जिला निर्वाचन अधिकारी मनीष रस्तोगी तथा एसपी जयदीप प्रसाद को मामले की जांच कर रिपोर्ट देने को कहा है। घटना स्थल पर मौजूद सीएसपी गोपाल खांडेल ने फोन पर बताया कि हालांकि अब तक किसी विद्यार्थी ने कोई भी मतदाता परिचय पत्र उनके सामने पेश नहीं किया है। पुलिस हर पहलू की जांच कर रही है।
लेकिन पत्र से जुड़े प्रत्येक पहलू की बारीकी से जांच की जाएगी। फिलहाल विद्यार्थियों के बयान लिए जा रहे हैं।
फिर क्यों की आत्महत्या
शनिवार की शाम मैनिट के निदेशक प्रो. केएस पांडेय ने भास्कर से दावा किया कि राहुल को परीक्षा में शामिल होने की अनुमति दे दी थी। उन्होंने उसे धमकी देने की बात से भी इनकार किया है। बकौल प्रो. पांडेय राहुल को परीक्षा में शामिल होने की अनुमति शुक्रवार को ही दे दी गई थी। ऐसे में सवाल यह उठता है कि यदि छात्र को रैगिंग प्रकरण से ही भविष्य बिगड़ने का डर था तो उसने परीक्षा में शामिल होने की अनुमति मिलने के बाद भी आत्महत्या क्यों कर ली?
फंदे पर झूला था
राहुल संस्थान के हॉस्टल नंबर तीन के कमरा नंबर 1110 में रहता था। शनिवार की दोपहर राहुल के साथियों ने उसे कमरे में फंदे पर लटका देखा। तुरंत उसे मालवीय नगर स्थित एक निजी अस्पताल लाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
पुलिस बल तैनात
राहुल की मौत के बाद उपजे असंतोष को देखते हुए संस्थान के गेट पर भारी पुलिस बल तैनात कर दिया गया। पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी छात्रों को शांत रहने की अपील करते रहे। अधिकारियों ने आश्वासन दिया कि जो भी दोषी होगा उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। इसके बाद भी छात्र वहां से हटने को तैयार नहीं थे। पुलिस ने राहुल का शव पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। बमुश्किल फोरेंसिक विशेषज्ञ अपनी टीम के साथ कॉलेज में प्रवेश कर सके। पुलिस मामले की छानबीन में जुट गई है।