Manoranjan
Cinema
Bollywood Bollywood परदे के पीछे.
हाल ही में लंदन की एक अदालत ने एक जोड़े को इस आधार पर तलाक की इजाजत दी कि पति ने साइबर दुनिया में अपने द्वारा रचे एक पात्र को अन्य पात्र के साथ प्रेम करने दिया अर्थात आभासी कल्पित संसार में किए गए व्यभिचार के लिए यथार्थ की अदालत दंडित कर सकती है जबकि पुर्नजन्म की अवधारणा के तहत दी गई किसी गवाही के आधार पर यथार्थ में कत्ल का मुकदमा कायम नहीं किया जा सकता यद्यपि हर गवाह गीता पर हाथ रखकर शपथ खाता है और स्वयं कृष्ण भी विष्णु के अवतार हैं।
टेक्नोलॉजी की सहायता से वैकल्पिक संसार का निर्माण किया जा रहा है। जिसे लैपटॉप कहते हैं, उसकी गोद में बैठकर दुनिया के किसी भी कोने और इतिहास के किसी भी कालखंड की यात्रा करते हुए वैकल्पिक संसार में विचरण किया जा सकता है। टेक्नोलॉजी से अपरिचित बुजुर्गो को भ्रम होता है कि कहीं वे काल्पनिक कालखंड में तो नहीं जी रहे हैं। टेक्नोलॉजी के चक्र को रोका नहीं जा सकता, ना अनदेखा किया जा सकता है।
उसी विराट चक्र का एक हिस्सा बनकर ही जिया जा सकता है। टेक्नोलॉजी की अपनी किंवदंतियां भी हैं। यह कितनी अजीब बात है कि तर्क और तथ्य से संचालित विज्ञान की भी किंवदंतियां बन जाती हैं। शायद हर कालखंड में यथार्थ के साथ कल्पना गलबहियां करते नजर आती है। यह बात अलग है कि कालांतर में लोग केवल किंवदंतियों और कुरीतियों को धर्म समझकर पालन करते हैं और असल मर्म अनदेखा और उपेक्षित कर दिया जाता है।
1944 में चेन्नई में ‘देवदासी’ नामक फिल्म बनी थी। नायिका सुंदर, स्वस्थ और सपने तथा इच्छाएं जगाने वाले शरीर की मलिका हैं। वह अत्यंत महंगी नगरवधू है और गरीब आदमी के साधनों के बाहर का विलास है। एक आम आदमी प्राय: उससे कम धन में सहवास की प्रार्थना करता है। यह उसके महल में प्रहसन की तरह प्राय: घटित होता है।
कुछ माह पश्चात उस आदमी का आना बंद हो जाता है। नगरवधु अपने नौकरों को कारण जानने का आदेश देती है। नौकर बताते हैं कि उस गरीब ने अपने मित्रों को बताया कि उसकी इच्छा स्वप्न में पूरी हो चुकी हैं नगरवधु स्वप्न में आई थी। नगरवधु ने राजा से फरियाद की कि उस आदमी से उसकी फीस दिलाई जाए। यह एक पेचीदा मुकदमा था। राजा परेशान हो गया परंतु नगरवधु ने मुकदमा वापस नहीं लिया।
उसका दावा था कि उसका उपभोग हुआ है, क्योंकि पूरी शिद्दत से उसे स्मरण करने पर ही उसे स्वप्न आया है। चतुर रानी ने मामला सुलझा दिया। उसने हजार स्वर्ण मुद्रा आसन पर रखीं और सामने आईना रख दिया। नगरवधु से कहा कि आईने में हजार स्वर्ण मुद्राओं की छवि वह अपने मेहनताने स्वरूप ले सकती है यथार्थ मुद्रा को हाथ नहीं लगा सकती। लंदन की अदालत को तलाक लेने वाली पत्नी के साथ ऐसा ही कुछ करना चाहिए था।