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तेलों में लंबी तेजी के आसार नहीं

इंदौर. सस्ते विदेशी खाद्य तेल की मार से घरेलू तिलहन उत्पादक व प्रोसेसर्स को बचाने के उद्देश्य से सरकार ने मंगलवार को कच्चे सोयाबीन तेल पर 20 फीसदी आयात शुल्क लागू कर दिया है उद्योग जगत के लोग इसे एक अधूरा कदम मानते हैं।

इससे भारतीय बाजारों में खाद्य तेलों के घटते भावों में रुकावट के साथ ही आंशिक सुधार भी देखा गया है लेकिन लंबी तेजी की स्थिति नजर नहीं आ रही है क्योंकि सरकार को क्रूड पाम तेल पर ड्यूटी लगाना ज्यादा जरूरी था न कि कच्चे सोया तेल पर। जब तक पाम तेल का आयात जारी रहेगा तब तक तेलों की कीमतों में तेजी की उम्मीद कम ही नजर आ रही है।

सरकार की अज्ञानता का प्रमाण है कि देश में हर महीने 50 से 1 लाख टन के करीब आने वाला कच्चा सोयाबीन तेल पर 20 फीसदी आयात शुल्क लगा दिया जिससे घरेलू तेल उद्योग को कोई विशेष लाभ नहीं होगा। दूसरी ओर 25 रुपए किलो वाला पाम तेल जो घरेलू तेल उद्योग को बंद की ओर धकेल रहा है उस पर कोई आयात शुल्क नहीं लगाया, देश में हर महीने पाम तेल 4.5 से 5 लाख टन के आसपास आता है। रिफाइंड खाद्य तेल पर भी आयात डच्यूटी बढ़ना जरूरी हैं।

सरकार द्वारा लिए मंगलवार को लिए गए निर्णय से खाद्य तेलों की कीमतों में भले कुछ सुधार हो गया हो लेकिन भविष्य में मंदी ही नजर आ रही हैं। देश में चालू वर्ष सोयाबीन का रिकॉर्ड उत्पादन होने से सोया प्लांटों की तेल उत्पादन क्षमता बढ़ती जा रही है। पिछले एक महीने से तेल की उपलब्धि बढ़ने से बाजारों में तेल की बिक्री में प्रतिस्पर्धा बनी हुई है जिससे कीमतें काफी गिर चुकी हैं। इस महीने सोयाबीन के भाव में लगभग 175 से 180 रुपए क्ंिवटल की कमी आ चुकी है।

इसी तरह से सोयाबीन तेल में भी लगभग 10 रुपए किलो की गिरावट दीपावली से अभी तक आ चुकी है। हालांकि गिरती कीमतों को रोकने के लिए 18 नवंबर को सरकार द्वारा कच्चे सोया तेल पर ड्यूटी लगाए जाने से बुधवार को तेलों में आंशिक सुधार हुआ है लेकिन लंबी तेजी की उम्मीद नहीं है क्योंकि सोया तेल की तुलना में सरकार को पाम तेल पर ड्यूटी लगाना चाहिऐ थी।

किसानों को भी नुकसान- पाम तेलों का आयात जारी रहा तो इसका नुकसान किसान, तेल उत्पादक, व्यापारी और खेरची व्यापारियों को भी उठाना पड़ेगा। सोयाबीन के उत्पादक उचित मूल्यों की प्राप्ति नहीं होने की दशा में आने वाले समय में सोयाबीन के उत्पादन में कटौती कर सकते हैं। ऐसे में सरकार को जल्द ही पाम तेल ड्यूटी लगा और रिफाइंड खाद्य तेलों पर डच्यूटी बढ़ना चाहिए ताकि आयात में कमी हो सके और किसानों को उचित मूल्य मिल सकें। मालवा क्षेत्र की मंडियो में सोयाबीन के दाम 1430 से 1460 रुपए के आसपास हो गए हैं।





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