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मुंबई. बिहार की कोसी नदी के बहाव में आए हाल के बदलाव से ढेरों समस्याएं खड़ी हो सकती हैं। नदी के आसपास के बड़े इलाके में इसके कारण आजीविका का संकट होने के अलावा भूमि संबंधी विवाद भी बढ़ सकते हैं। टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज, मुंबई ने अपनी रिपोर्ट में यह चेतावनी दी है।
चार सदस्यीय शोध दल द्वारा तैयार रिपोर्ट के अनुसार अन्य नदियां यूं तो अपने साथ उपजाऊ मिट्टी लेकर आती हैं जबकि कोसी अपने साथ खराब मिट्टी व नदी प्रणाली के ऊपरी इलाकों से बालू लाती है।
शोध दल का नेतृत्व करने वाले डॉ. मनीष कुमार झा के अनुसार यह रिपोर्ट बिहार के बाढ़ प्रभावित इलाकों की पांच दिनों की यात्रा के आधार पर तैयार की गई है। दल ने सितंबर के प्रारंभ में तीन जिलों-सहरसा, सुपौल और मधेपुरा की यात्रा की थी। दल के साथ दिल्ली विश्वविद्यालय के दिल्ली स्कूल ऑफ सोशल वर्क के छात्रों ने भी काम किया था।
रिपोर्ट में बताया गया है कि हजारों एकड़ कृषि भूमि के बर्बाद होने से लोगों की आजीविका के लिए संकट खड़ा हो सकता है। बिहार देश के ज्यादा आबादी वाले राज्यों में से एक है और सरकार के पास प्रभावित लोगों के लिए वैकल्पिक आजीविका की व्यवस्था के लिए पर्याप्त संसाधन नहीं हैं। ऐसे में भूमि संबंधी विवाद बड़े मामलों का रूप ले सकते हैं।