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यथार्थ प्रेम की परदे पर अभिव्यक्ति

परदे के पीछे. सलमान खान और कैटरीना कैफ पांच वर्षो से गहरे मित्र हैं और कैटरीना स्वीकार करती हैं कि लंदन से मुंबई फिल्मों में आते ही उन्हें सलमान का मार्गदर्शन मिला और उनकी सफलता का बहुत सा श्रेय सलमान को जाता है।

गहरी दोस्ती को इश्क में बदले भी लंबा समय हो गया है। कैटरीना की विगत सात फिल्में सफल रहीं और इस समय विज्ञापन फिल्मों से भी उन्हें ढेर सा धन मिल रहा है। तलाकशुदा मां और सात बहनों के परिवार की कमाने वाली वह एकमात्र सदस्य है। वह पहले वर्ष ही सलमान से शादी करना चाहती थी परंतु सलमान ने कहा कि वह अपनी सितारा बनने की महत्वाकांक्षा पहले पूरी कर ले।

आज कैटरीना के पास शोहरत दौलत सब कुछ है, परंतु वह सफलता के शिखर पर विवाह नहीं करना चाहतीं। व्यक्तिगत जीवन में सलमान संजीदा और खामोश किस्म के अंतमरुखी व्यक्ति हैं, अपनी इच्छा को दबाने का अद्भुत माद्दा है उसके पास। सलमान आसानी से अभिव्यक्त नहीं होते और उन्हें समझना भी आसान नहीं है। उसके सोच-विचार की सुई से हाथी निकल सकता है परंतु दुम अटक सकती है। एक वक्र नजर उसे खफा कर सकती है।

सलमान खान और कैटरीना सुभाष घई की फिल्म ‘युवराज’ में प्रेमियों की भूमिका में पहली बार प्रस्तुत हो रहे हैं। यथार्थ जीवन में प्रेमी रहने पर भी परदे पर उसका निर्वाह हमेशा नहीं हो पाता। राजकपूर-नरगिस और धर्मेद्र-हेमा ने दर्जनों फिल्मों में साथ में काम किया परंतु ‘प्यार हुआ, इकरार हुआ’ सा असर सभी निर्देशक प्रस्तुत नहीं कर पाए। प्रेम करना और परदे पर प्रेम प्रस्तुत करना दो अलग बाते हैं। जब दिलीप कुमार और मधुबाला के बीच प्रेम संबंध समाप्त हो चुके थे तब उन्होंने ‘मुगले आजम’ के लिए अद्भुत प्रेम दृश्य प्रस्तुत किए।

प्रेम की वह तीव्रता जिससे परदा फटता सा नजर आता था, उन दोनों की विलक्षण अभिनय प्रतिभा का परिणाम है। इस प्रकरण में निर्देशक की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। धर्मेद्र और हेमा ने जो जादू ‘शोले’ में जगाया वह अन्य फिल्मों में नजर नहीं आता।

देव आनंद और जीनत ‘हरे रामा हरे कृष्णा’ में बहन-भाई की भूमिकाओं में थे और जब उनमें प्यार हुआ तब उनकी कोई फिल्म नहीं हो पाई। जब अमिताभ बच्चन, रेखा और पत्नी जया का प्रेम तिकोण शिखर पर था तब उन तीनों की अभिनीत और यश चोपड़ा की निर्देशित ‘सिलसिला’ घोर असफल फिल्म सिद्ध हुई क्योंकि व्यक्तिगत जीवन में उड़ रही चिंगारियां परदे पर ठंडे कोयले की तरह प्रस्तुत हुईं।

व्यक्तिगत जीवन में सच्चा प्यार होते ही आत्मा में सैकड़ों सूर्य दमक जाते हैं परंतु इस दिव्य अनुभूति को परदे पर प्रस्तुत करने के लिए उनका विलक्षण कलाकार होना जरूरी है और सबसे अहम है निष्णात निर्देशक की मौजूदगी। क्या सुभाष घई सलमान-कैटरीना के प्रेम दृश्यों में प्राण फूंक पाएंगे? संजय लीला भंसाली ने ‘हम दिल दे चुके सनम’ में सलमान-ऐश्वर्य के प्रेम के रसायन को बखूबी प्रस्तुत किया था। गौरतलब यह भी है कि क्या सलमान कैटरीना में सलमान और ऐश्वर्या वाली अनुभूति की तीव्रता है?





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