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अमृतसरकम समय में ज्यादा आउटपुट देने का प्रेशर हर कंपनी में रहता है, लेकिन अगर आपके काम को सही मायने में आंकने वाला कोई हो तो काम करने का और भी ज्यादा मजा आता है। हालांकि गलती करने पर तो डांट पड़ना स्वाभाविक है, लेकिन यदि अच्छा काम करने पर बॉस का प्यार, दुलार और शाबाशी मिले तो काम में और भी ज्यादा निखार आता है।
आजकल के ऑफिस कल्चर में यह बहुत जरूरी हो गया है। काम तो सब अच्छा ही करना चाहते हैं, लेकिन कभी-कभी बॉस की अनदेखी की वजह से इंप्लाई मायूस हो जाता है। इसके कारण अक्सर दोनों के बीच दूरियां भी बढ़ती चली जाती हैं। अगर बॉस को काम लेने की कला आती है तो इंप्लाई के साथ-साथ संस्थान भी तरक्की करता है।
बॉस नहीं दोस्त बनें
बॉस को बॉस बनकर नहीं बल्कि एक दोस्त बनकर इंप्लाई से काम निकलवाना चाहिए, जिससे इंप्लाई भी पूरा सहयोग दे सकेगा। इंप्लाई को भी चाहिए कि काम में आने वाली अपनी परेशानियां भी बॉस से शेयर करे, ताकि काम को बेहतर तरीके से अंजाम दिया जाए।
-राकेश शर्मा बैक मेनेजर
समस्या को खुद सुलझाएं
हर काम करने वाले इंप्लाई के साथ डेली मीटिंग में सब कुछ विनम्रता के साथ बताएं। जो बात आपको पसंद नहीं है उसे स्पष्ट करें और अगले की प्रॉब्लम को समझते हुए अपनी टीम को सहयोग दें। अव्वल तो बॉस इंप्लाई की समस्या को निजी मानते हुए उसमें सहयोग करें। इससे इंप्लाई बॉस के करीब रहेगा और काम अच्छा निकलेगा। -आशीष, आरएम
इंप्लाई को लें विश्वास में
ऑफिस में काम लेना भी एक कला है। अगर काम लेना है तो काम देने वाले को काम बता कर पहले उसे अपने विश्वास में लें। अगर काम अच्छा हो तो सार्वजनिक तौर पर शाबाशी दें। इसके विपरीत अगर कोई गलती हो जाए तो एकांत में समझाएं। इससे इंप्लाई का आपके प्रति सम्मान बनेगा और भविष्य में वह अच्छा काम करेगा।
-मोहित शर्मा, सेल्स मैनेजर
मैं एक कंपनी में पिछले छह महीने से सेल्स मैनेजर के पद पर कार्यरत हूं। शुरुआत में बॉस के सहयोग से काम अच्छा भी हुआ, लेकिन इधर कुछ दिनों से किसी बात को लेकर बॉस टेंशन में रहते हैं। इसका असर मेरे काम पर भी पड़ने लगा है। पहले जिस काम को मैं अच्छी तरह से कर लेता था अब उसी में ढेरों गलतियां निकल रही हैं। इसके कारण ऑफिस का माहौल भी बिगड़ गया है।
—राजीव शर्मा
मैं एक कंपनी में मैनेजर हूं। किसी काम में गलती हो जाए तो डांट पड़नी निश्चित है, लेकिन जब मैं अच्छा करता हूं तो बॉस की शाबासी भी मिलनी चाहिए। लेकिन जब बॉस ऐसा नहीं करते तो उत्साह और उमंग से काम करने का मन नहीं करता और ऑफिस का काम प्रभावित होता है और ध्यान हमेशा बॉस का चेहरा पढ़ने में लगा रहता है ।
-सुनील