Breaking News 
bhaskar Web English


HomeNewsMetrosIndore Indore

खामियाजा हम क्यों भुगतें?

इंदौर. एबी रोड से लगी स्कीम-५४ के ५ ‘एए’ में रहने वाली कृष्णा भंडारी व उनके बच्चों को बीआरटीएस की खुदाई के कारण सड़क पर गाड़ी रखना पड़ती थी। ९ अगस्त की रात बाहर खड़ी उनकी ११ लाख की गाड़ी चोरी हो गई जिसकी विजयनगर चौकी पर रिपोर्ट भी दर्ज है।

दर्जनभर से ज्यादा चक्कर काटने के बाद कंपनी ने जैसे-तैसे भराव करके आने-जाने लायक रास्ता बनाया। कुछ दिन राहत मिली ही थी कि दो दिन पहले आए कंपनी के इंजीनियर दोबारा खुदाई शुरू होने की सूचना दे गए। इससे फिर भंडारी परिवार की नींद उड़ गई है।

बीआरटीएस निर्माण के लिए विजय नगर चौराहे से निरंजनपुर के बीच सालभर से खुदाई और भराव का खेल जारी है। इससे सड़क से लगे मकान और मल्टियों में रहने वाले दो सौ से ज्यादा परिवारों की हालत यही है। ऐसे मकान या मल्टियां भी कम नहीं जहां वाहनों की आवाजाही मुश्किल है।

लोगों को घर के बाहर गाड़ियां खड़ी करना पड़ती हैं। इंदौर विकास प्राधिकरण और कंपनी के हीलहवाले से परेशान हो चुकी श्रीमती भंडारी ने बताया विकास में सहयोग का जज्बा नहीं होता तो हम भी स्टे लाकर कभी के खुदाई रुकवा चुके होते। बावजूद इसके आईडीए और कंपनी हमारी मजबूरी समझने को तैयार नहीं। कंपनी ने भराव करके रास्ता तो बना दिया लेकिन गड्ढों से दुर्घटना की आशंका रहती है। बच्चे गिरते हैं सो अलग। बड़े अरमान के साथ एमआईजी से यहां शिफ्ट हुए थे लेकिन डेढ़ साल से लगता है कहां आकर फंस गए।

स्कीम-५४ में ही ४ ‘एए’ में रहने वाले एमपीईबी के सेवानिवृत्त एक्जीक्यूटिव डायरेक्टर पी.सी. श्रीवास्तव भी चार मर्तबा हुई खुदाई से परेशान हैं। उनका कहना है महकमों या कंपनी के बीच समन्वय नहीं है तो इसकी सजा लोग क्यों भुगतें? जेब से पैसा देकर रास्ता बनाकर हटते हैं और कंपनी वाले आकर खोद जाते हैं। खुदाई के कारण कोई गिरे या मरे, किसी को कोई फर्क नहीं पड़ता। प्राधिकरण के इंजीनियर झांकते तक नहीं, मॉनिटरिंग क्या करेंगे। टुकड़ों में काम हो। एक हिस्सा पूरा होने के बाद ही दूसरे पर काम शुरू हो।

तीस हजार रुपए महीने का झटका
स्कीम-७८ तिराहे पर कोचिंग क्लास के परीक्षा समन्वयक मनीष राहतल के अनुसार तीस साल मुंबई रहने के बाद तीन महीने पहले इंदौर शिफ्ट हुआ हूं। खुदाई के कारण स्कूटर पर कोचिंग आता हूं क्योंकि यहां कार खड़ी करने की जगह नहीं है। अप्रोच रोड की कमी नए एडमिशन के गिरते ग्राफ में भी दिखती है।

चौथाई रह गई दुकानदारी
पटेल मोटर के सामने चाय की दुकान चलाने वाले रामदास चौधरी ने बताया खुदाई से पहले होने वाला तीन हजार रुपए रोज का गल्ला सात सौ रुपए तक सिमट चुका है। सड़क की ग्राहकी पूरी तरह खत्म हो चुकी है।

ट्रेजडी का ट्रांजिट सिस्टम

>> जून 2008 में इंदौर से गुना जा रही बस का एक हिस्सा खुदे हुए हिस्से में लटका। यात्री जैसे-तैसे निकले। पास खड़ी क्रेन से बस को सड़क पर लाना पड़ा।
>> अगस्त 2008 में सत्यसांई चौराहे से पहले बनी मेट्रो टॉवर के सामने ट्रैक्टर-ट्रॉली पलटने से एक की मौके पर ही मौत हो गई जबकि चार घायल हुए।
>> सितंबर 2008 में देवास से चामुंडा देवी के दर्शन करके लौट रहे नेहरू नगर निवासी अमित यादव का सामने से पड़ी लाइट के कारण बैलेंस बिगड़ा और बाइक गड्ढे में जा गिरी। फ्रेक्चर के कारण हाथ पर महीनेभर पट्टा चढ़ा रहा।
>> सप्ताहभर पहले मंगल सिटी के सामने खुदाई के दौरान जेसीबी के पंजे में लोहे का पाइप आ गया। पंजा उठते ही पाइप जमीन पर गिरा और जंप के साथ खुदाई देख रहे एक व्यक्ति के सिर पर जा गिरा। तत्काल इलाज मिलने के कारण व्यक्ति की जान बची।





अपने विचार यहां लिखें
नाम:
ईमेल आईडी:
भाषा चुनॆ
हिन्दी रॊमन‌ हिन्दी फॊनॆटिक English
विचार:
कोड: