|
इंदौर. क्षेत्र में दोनों दलों के उम्मीदवारों को मुख्य छह अधूरी योजनाओं से जूझना पड़ेगा। वृंदावन कॉलोनी के मोहनलाल कहते हैं यहां सड़कें बन रही हैं, अच्छी बात है, पर उनकी कछुआ चाल के कारण परेशानी बढ़ी हुई है।
मरीमाता चौराहे से शुरू हुए सांवेर रोड का यातायात इतना बेतरतीब है सड़क पर चलने में डर लगता है। पता नहीं यह रोड कब चौड़ी और व्यवस्थित होगी। एरोड्रम रोड के दुकानदार मदनलाल और मथुरा कहते हैं करीब 10 माह में व्यास पुल से एरोड्रम थाने तक मात्र एक तरफ का मार्ग बना वह भी अधूरा है। इस कारण इतनी धूल होती है कि घर पहुंचकर मुंह पोंछने पर सफेद रूमाल गंदा हो जाता है।
जब रिंग रोड का अधिकांश हिस्सा बन चुका है तो धार रोड से सांवेर को जोड़ने वाले पश्चिमी रिंग रोड की बात केवल नेताओं का सब्जबाग है। लगभग आठ से 10 साल बाद भी इस रोड के निर्माण में आने वाली बाधा दूर नहीं की जा सकी जबकि इस दौरान दोनों प्रमुख दलों की सरकार रह चुकी है। गंगवाल बस स्टैंड की बदतर हालत देखकर तो लोग त्रस्त हो चुके हैं। बेहतर व्यवस्था के अभाव में बसें बेतरतीब खड़ी रहती हैं।
अस्पताल निगल गए
बाणोश्वर कुंड बाणगंगा में 2003 में तत्कालीन मुख्यमंत्री ने 100 बिस्तर वाले अस्पताल का भूमि पूजन किया था। उस समय उसकी लागत एक करोड़ 25 लाख रुपए बताई गई थी। फिर सियासत बदल जाने से अस्पताल तो नहीं बना और अब तो शिलालेख भी गायब हो गया।
चार एकड़ का बगीचा
वर्ष 2002-03 में ही प्रस्तावित नए अस्पताल के सामने लगभग चार एकड़ में अत्याधुनिक बगीचा बनने वाला था। हरियाणा से बनकर आई डिजाइन के आधार पर उसे अमली रूप दिया जाना था पर उसका अब तक पता नहीं है।
पक्षी विहार
धार रोड पर सिरपुर तालाब में लगभग छह साल पहले पक्षी विहार की योजना बनी और चार साल पहले निर्माण शुरू हुआ। अब तक 20-30 प्रतिशत ही काम हो सका है।
गंगवाल तक बांड रोड
गंगवाल बस स्टैंड से राजमोहल्ला, अंतिम चौराहा होते हुए एरोड्रम रोड स्थित व्यास पुल तक बांड रोड का निर्माण भी ढाई-तीन साल पहले शुरू हुआ किंतु रोड खालसा स्कूल तक ही बनी। शेष निर्माण अतिक्रमण हटाने और मुआवजा देने जैसी प्रक्रियाओं में उलझकर रह गया है।
सांवेर रोड से दूर भागीरथपुरा
भागीरथपुरा से सांवेर रोड नजदीक है किंतु दोनों को जोड़ने वाला पुल व मार्ग नहीं है। इसके लिए सालों से जनप्रतिनिधि लोगों को आश्वासन की मीठी चासनी पिलाते रहे। भागीरथपुरा से सांवेर रोड आने-जाने के लिए दो-तीन किलोमीटर घूमकर जाना पड़ता है।
पानी की छह टंकियां
क्षेत्र में संगम नगर, पल्लर नगर, चंदन नगर, जिंसी हाट मैदान, कान्यकुब्ज नगर व महेश गार्ड लाइन में 15 करोड़ रुपए लागत से छह टंकियों का निर्माण शुरू हुआ लेकिन इनमें से चंदन नगर को छोड़ बाकी सभी का काम अधूरा है।