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मूर्ति तस्कर घीया को उमक्रैद

जयपुर. diya ‘ऑपरेशन ब्लैक होल’ के नाम से चर्चित रहे मूर्ति तस्करी प्रकरण का फैसला गुरुवार को सुना दिया गया। शहर की फास्ट ट्रैक कोर्ट ने मुख्य आरोपी वामन नारायण घीया व अन्य आरोपी बन्ने सिंह को दोषी करार देते हुए उम्रकैद एवं 70 हजार रुपए जुर्माने से दंडित किया है, जबकि 16 आरोपियों को चार-चार महीने की जेल और तीन को बरी कर दिया। चार अन्य आरोपी फरार हैं।

एडीजे कोर्ट (क्रम-1) के पीठासीन अधिकारी फूलचंद झाझड़िया ने अपने आदेश में 16 आरोपियों को पुरावस्तु व बहुमूल्य कला संग्रह अधिनियम की धारा 14, 25 (2) के तहत दोषी माना। इनमें प्रदीप मल्होत्रा, विकास यादव, रामेश्वर गुर्जर, जगदीश चन्द्र, मनोज शर्मा, मदनलाल अग्रवाल, बादल शर्मा, श्रीवर मीणा, लच्छी मीणा, जनकराम, दयालचंद जैन, मुन्ना अली, गोपाल, शेरसिंह, कमलेश एवं जोगेन्द्र सिंह हैं। तीन आरोपियों-विधीचंद, शिवस्वरूप गोयल एवं जगदीश शर्मा को सभी आरोपों से दोषमुक्त करते हुए बरी कर दिया। फरार आरोपी हैं- जीतेन्द्र पाल सिंह, राकेश सिंह, रोशन गुर्जर व भरत लाल।

गौरतलब है कि विद्याधर नगर थाने के तत्कालीन थानाधिकारी रामसिंह ने 6 जून, 2003 को मूर्तियों की चोरी एवं तस्करी की रिपोर्ट दर्ज करवाई थी। बाद में पुलिस ने वामन नारायण घीया एवं प्रदीप मल्होत्रा सहित 18 से ज्यादा आरोपियों की गिरफ्तारी की तथा उनके कब्जे से काफी संख्या में मूर्तियों एवं कलाकृतियों को बरामद किया। पुलिस ने सितंबर 2003 में मूर्तियों की तस्करी में लिप्त घीया सहित 25 आरोपियों के खिलाफ कोर्ट में चालान पेश किया था। अभियोजन पक्ष की ओर से अदालत में 83 गवाह पेश करने के अलावा 1189 दस्तावेज रखे गए।

पांच साल से ज्यादा चला केस

जयपुर. कुख्यात मूर्ति तस्कर वामन नारायण घीया व उसके सहयोगियों को सजा दिलाने की कानूनी प्रक्रिया पांच साल से भी अधिक समय तक चली। ‘ऑपरेशन ब्लैक होल’ नाम से चर्चित इस मुकदमे की सुनवाई के दौरान अनुसंधान अधिकारी राम सिंह के निचली अदालत (ट्रायल कोर्ट) में 13 मार्च 08 से 30 मई तक लगातार कुल 358 पेज में बयान हुए। अदालत का फैसला 650 पेजों में है।

गुरुवार को कोर्ट परिसर में सभी की जुबान पर घीया प्रकरण की ही चर्चा थी। सुबह 10.30 बजे बाद घीया सहित सभी आरोपियों को कोर्ट में पेश किया गया। पीठासीन अधिकारी फूल चंद झाझड़िया ने घीया व बन्ने सिंह का दोष आईपीसी की धारा 413 एवं 411 सहित पुरावस्तु व बहुमूल्य कला संग्रह अधिनियम की धारा 14, 25 (2) एवं 3, 25 (1) के तहत प्रमाणित किया।

ट्रायल कोर्ट में प्रकरण की सुनवाई के दौरान उठे बिंदुओं में से एक यह भी था कि 1892 के बाद आईपीसी की धारा 413 से संबंधित किसी भी केस का फैसला नहीं हुआ। इस धारा में 10 साल से लेकर आजीवन कैद की सजा का प्रावधान है। घीया ने धारा 413 के आरोप को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी, पर उसकी याचिका खारिज हो गई। इसके अलावा देश का यह पहला केस था कि जो दुनिया की प्रतिष्ठित मैग्जीन ‘टाइम’ में 30 अक्टूबर 2003 को कवर स्टोरी की तरह छपा।

घीया पर शिकंजे की शुरुआत
विद्याधरनगर थाने के तत्कालीन थानाधिकारी रामसिंह के 6 जून 2003 को मूर्तियों की चोरी एवं तस्करी की रिपोर्ट दर्ज करवाने के साथ शुरू हुई। पुलिस ने अन्य आरोपियों से पूछताछ के बाद घीया व प्रदीप मल्होत्रा सहित डेढ़ दर्जन से अधिक आरोपियों की गिरफ्तारी की तथा उनके कब्जे से काफी मात्रा में मूर्तियों एवं कलाकृतियों को बरामद किया। इसके बाद सितंबर 2003 में मूर्तियों की तस्करी में लिप्त 25 आरोपियों के खिलाफ कोर्ट में चालान पेश किया था। इनमें से सात जनों की जमानत हो गई थी। सुनवाई के दौरान अभियोजन की ओर से न्यायालय में 83 गवाह एवं 1189 दस्तावेजों को पेश किया गया। जबकि बचाव पक्ष की ओर से न्यायालय में 10 एवं 677 दस्तावेज पेश किए गए।

बयान बदलने वालों को नोटिस
कोर्ट ने अभियोजन के गवाह श्रेतुराम मीणा एवं सिपाही मदन सिंह को नोटिस जारी किए हैं जिन्होंने मामले की सुनवाई के दौरान बयान बदले थे।





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