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International International न्यूयॉर्क. अमरीका के नव निर्वाचित राष्ट्रपति बराक ओबामा सुस्त पड़ी अर्थव्यवस्था में जान फूंकने के लिए उन उपायों को आजमाने जा रहे हैं जो 1970 के बाद से कभी अमल में नहीं लाए गए। इसके तहत कुछ उद्योगों, उत्पादों को सरकारी सहारा दिया जाएगा।
अमरीका के प्रमुख बिजनेस अखबार वाल स्ट्रीट जनरल में छपी एक खबर के मुताबिक नई वित्तीय नीतियों के तहत सरकारी मदद मांगने वाले बैंकों पर कर्ज लेने और बंदी की गति थामने का दबाव डाला जाएगा।
आटोमोबाइल कंपनियों से कम ईंधन खाने वाले आधुनिक वाहन तैयार करने को कहा जाएगा और कोयले से बिजली बनाने के उद्यम को हतोत्साहित कर सौर और वैकल्पिक ऊर्जा के उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए अरबों डालर आवंटित किए जाएंगे।
खबर के मुताबिक ओबामा के सलाहकारों का कहना है कि इस मुश्किल वक्त में सख्त कदम उठाना जरूरी हो गया है। आटो सैक्टर के सुधार के लिए बड़े पैमाने पर उलटफेर के साथ ही वित्त और सूचना प्रौद्योगिकी जैसै क्षेत्रों में भी सुधार कार्यक्रम चलाना होगा।
1980 के दशक में ऐसी ही नीतियों को सफलतापूर्वक अंजाम दे चुके और ओबामा के आर्थिक सलाहकार डेविड बोनियर ने एक सवाल के जवाब में माना कि यही सुधार कार्यक्रम आगे चलकर ओबामा सरकार की औद्योगिक नीतियों का रूप ले लेगा।
अखबार के मुताबिक, इन नीतियों के आलोचकों का कहना है कि अर्थव्यवस्था में गति लाने के ये सरकारी प्रयास वैसे ही हैं जैसे जापान, साउथ कोरिया और जर्मनी ने तीन दशक पहले अपनाए थे लेकिन गहरे आर्थिक संकट में फंसने के बाद इन तरकीबों से मुक्ति पा ली थी।
आलोचकों का कहना है कि विश्व पूंजी बाजार में जब उथल-पुथल मची हो तो मुक्त बाजार की नीतियां को आलोचना का शिकार होना लाजिमी है।