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इंग्लैंड के फ्रेंक डकवर्थ और टोनी लुइस ने इस नियम को बनाया। सबसे पहले 1996-97 में इंग्लैंड-जिम्बाब्वे वनडे सीरीज के दौरान इसे आजमाया गया। उस मैच में जिम्बाब्वे सात रन से जीतने में कामयाब रहा। आईसीसी ने 2001 में इसे नियम को मान्यता दे दी।
कब काम में आता है?
मैच में किसी भी तरह की बाधा पड़ने पर इस नियम से परिणाम तय किया जाता है। उदाहरण के लिए पहले खेलने वाली टीम की पारी में बाधा नहीं पड़ती है और दूसरी पारी में खेल किसी कारण से रुक जाता है, तो उसे घटा हुआ लक्ष्य मिलेगा। इस दौरान यह देखा जाता है कि उसकी पारी में कितने ओवर व कितने विकेट शेष हैं।
कैसे काम करता है?
इस नियम में ‘रिसोर्स’ सबसे महत्वपूर्ण है। इसकी गणना टीम के ओवर, विकेट व रनों के हिसाब से की जाती है। उदाहरण के लिए 25 ओवर के खेल में कोई टीम पांच विकेट खो देती है और बारिश के कारण खेल रुक जाता है।
इस स्थिति में नियम के हिसाब से उस टीम के 42.2% रिसोर्स शेष होते हैं। यदि 15 ओवर का खेल धुल जाता है, तो पारी शेष 10 ओवरों में पूरी की जाएगी। नियम के अनुसार 10 ओवर शेष हैं और पांच विकेट गिर चुके हैं, तो टीम के रिसोर्स 26.1% बचते हैं। यानी 42.2-26.1 = 16.1. यदि टीम 250 रन के लक्ष्य का पीछा कर रही है, तो इस तरह गणना होगी : पारी के शुरू में रिसोर्स = 100%, खोया हुआ रिसोर्स = 16.1% और उपलब्ध रिसोर्स = 83.9%।
अब गणना होगी : 250383.9/100 = 209.75 यानी टीम को 210 रन का लक्ष्य मिलेगा।