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Chhattisgarh
Raipur Raipur छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव में लोगों ने मतदान में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। राज्य में भारी मतदान के आखिर मायने क्या हैं? आखिर वह कौन सी बात है जो लोगों को मतदान केंद्रों तक खींच लाई? क्या कोई लहर थी, किसी के पक्ष में या फिर किसी के विरोध में? क्या वास्तव में यह मुद्दाविहीन चुनाव था या किसी सार्थक नतीजे के पक्ष में लोग बाहर निकले।
परिस्थितियों पर गौर करें और मतदाताओं के समूह को देखें तो ऐसा लगता है कि महिलाओं और युवा वर्ग ने मतदान में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। पहली बार वोट डालने का रोमांच कहें या फिर सत्ता का स्वरूप तय करने की लालसा, युवा वर्ग ने अपनी बात वोट के जरिए कहने में कोई संकोच नहीं किया। स्व सहायता समूहों के जरिए राज्यभर में सक्रिय हुई महिलाओं के मन में जागरुकता बढ़ी, ऐसा भी माना जा सकता है।
दैनिक भास्कर टीम ने उत्साहवर्धक मतदान का कारण जानने के लिए समाज के प्रबुद्ध वर्ग से उनकी राय जानने का प्रयास किया तो कुछ ऐसे विचार सामने आए। सच्चिदानंद जोशी, कुलपति कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता विश्वविद्यालय का मानना है कि लोगों में सकारात्मक सोच विकसित हुई। लोग वोट देने गए, भले ही उन्होंने किसी को भी वोट दिया हो। कोई मुद्दा नहीं होने के बावजूद लोगों ने जबर्दस्त उत्साह दिखाया। नए मतदाताओं ने बढ़-चढ़कर वोट डाला है। मतदान के लिए चलाए गए जागरुकता अभियान का असर लोगों पर हुआ है।
पूर्व मुख्य सचिव और राज्य निर्वाचन आयुक्त शिवराज सिंह मानते हैं कि लोगों को वोट डालने के लिए प्रेरित करने का नतीजा है कि इस तरह राज्य में हैवी पोलिंग हुई। श्री सिंह ने यह कहने में भी संकोच नहीं किया कि यह सकारात्मक वोटिंग का संकेत भी हो सकता है।
हाईकोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता और प्रसिद्ध लेखक कनक तिवारी ने कहा कि हैवी पोलिंग के अनेक कारण हो सकते हैं। इनमें से एक विभिन्न उम्मीदवारों के समर्थकों के द्वारा कराया जाने वाला बोगस मतदान भी हो सकता है। मतदाताओं में आई जागरुकता, निश्चित रूप से एक बड़ा कारण है। आज का वोटर बहुत सजग है। वह चुप था, लेकिन बड़ी संख्या में वोट डालने पहुंचा। इसलिए इसे किसी के पक्ष या विपक्ष में न देखा जाए।
मनोवैज्ञानिक श्रीमती वर्षा वरवंडकर का मानना है कि युवा वर्ग ने बाहर निकलकर अपने वोटों का महत्व बताया है। वे लोकतंत्र में अपनी भागीदारी निभाना चाहते हैं। वोटिंग के लिए बेहतर इंतजाम और ईवीएम का उपयोग, लोगों को वोट डालने के लिए प्रेरित करने वाले कारकों में प्रभावी हो सकते हैं पर निश्चित रूप से इसके अलावा भी कुछ कारण हो सकते हैं। कहीं न कहीं लोगों ने यह संदेश देने का भी प्रयास किया है कि उन्हें अपने वोट का महत्व पता है और इसे व्यर्थ नहीं जाने देंगे।
रविशंकर विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति एनके गौराहा का कहना है कि लोकतंत्र के लिए ज्यादा वोटिंग एक शुभ संकेत है। इससे यह भी पता चलता है कि लोगों को अपने वोट की कीमत अब समझ आने लगी है।