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असिस्टेंट ड्राइवरों का रेलवे से मोहभंग

बिलासपुर. असिस्टेंट लोको पायलटों (सहायक इंजन ड्राइवर) का रेलवे से मोहभंग होने लगा है। शायद यही कारण है कि दक्षिण पश्चिम रेलवे में छठवां वेतन आयोग की अनुशंसा के बाद 80 लोगों ने रेलवे को अलविदा कह दिया। वहीं 350 लोगों ने अन्य स्थानों में नौकरी के लिए आवेदन दिया है। संभावना है कि आने वाले समय में यहां भी स्थिति ऐसी बन सकती है।

मिली जानकारी के मुताबिक इंडियन रेलवे में वर्तमान समय में लगभग 9 हजार सहायक लोको पायलटों के पद रिक्त हैं, जिन्हें भरने के लिए सहायक लोको पायलटों की तीव्र आवश्यकता है। लेकिन इसके विपरीत सहायक लोको पायलटों का रेलवे से मोहभंग होना रेलवे के लिए चिंता का विषय बना हुआ है। बताया जा रहा है कि जिस दिन पे-कमीशन की अनुशंसा आई, उसके बाद से असिस्टेंट लोको पायलटों का रेलवे से जाने का क्रम बना हुआ है।

दक्षिण पश्चिम रेलवे हुगली में ही 80 लोगों ने रेलवे की नौकरी छोड़कर अन्य स्थानों में ज्वाइन कर लिया। वहीं 350 सहायक लोको पायलटों ने अन्य स्थानों में नौकरी के लिए आवेदन दिया है। इसके लिए उन्हें परीक्षा में सम्मिलित होना है। इधर इसकी जानकारी मिलते ही रेलवे बोर्ड ने इस पर चिंता जताते हुए इसके लिए दक्षिण पश्चिम रेलवे को लिखा, जिसके बाद असिस्टेंट लोको पायलटों को उक्त सलेक्शन परीक्षा में बैठने के लिए मनाही कर दी गई थी। इससे पायलटों ने बेंगलोर हाईकोर्ट में मामला दायर किया था। इसमें उन्हें कोर्ट से राहत मिली, जिसके बाद रेलवे को उन्हें परीक्षा में बैठने की अनुमति देनी पड़ी। इस परीक्षा और सलेक्शन के बाद यह 350 असिस्टेंट लोको पायलट कभी भी रेलवे छोड़कर जा सकते हैँ।

संभावना है कि इससे अन्य स्थानों में बाद में ऐसी स्थिति आ सकती है, जिससे आने वाले समय में रेलवे के सामने पायलटों की कमी की समस्या और गहरा सकती है। वैसे भी वेतन विसंगति को लेकर कई रेलवे जोनों में विरोध के स्वर मुखरित हो रहे हैं। इसमें एसईसीआर भी शामिल है जहां विगत 15 अक्टूबर से असिस्टेंट लोको पायलट लगातार आंदोलन कर रहे हैं।

इसमें उनके खिलाफ कार्रवाई का दौर भी जारी है, जिससे उनमें रेलवे के प्रति भी आक्रोश पनप रहा है और वेतन विसंगति को लेकर पे कमीशन के खिलाफ चल रहा उनका आंदोलन रेलवे की तरफ भी मुड़ता नजर आ रहा है। इस आंदोलन का हश्र चाहे जो हो, लेकिन इस बात की संभावना बनी हुई है कि दक्षिण पश्चिम रेलवे सहित अन्य जोन की तरह यहां भी असिस्टेंट लोको पायलट रेलवे से विदाई ले सकते हैं। हालांकि अभी इस बारे में यहां स्थिति स्पष्ट नहीं है, लेकिन कुछ सुगबुगाहट जरूर है।

बोर्ड ने ली मीटिंग: इस मामले को लेकर रेलवे बोर्ड चिंतित है। तीन दिन पूर्व ही बोर्ड ने रनिंग स्टाफ एसोसिएशन के राष्ट्रीय महासचिव एमएन प्रसाद को बुलाकर उनसे इस संबंध में गहन चर्चा की है। हालांकि इसके बाद भी स्थिति में कुछ बदलाव नहीं है।





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