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Madhya Pradesh
Gwalior Gwalior ग्वालियर. कोई अपने जीवनसाथी के बारे में, तो कोई ससुराल वालों के साथ तालमेल बैठाने के लिए विवाह बंधन में बंधने जा रहे युवक-युवती मनोचिकित्सकों का सहारा ले रहे हैं। आजकल प्री-मैरिज काउंिसलिंग के लिए आने वाले युवक-युवतियों की भीड़ इन डाक्टरों के पास बढ़ती जा रह ही है।
शहर के मनोचिकित्सकों के अनुसार एक महीने में चार से पांच कपल काउंसिलिंग के लिए उनके पास आ रहे हैं। पहले घर के बुजुर्ग शादी के लिए रिश्ते तय करते थे। बदलते सामाजिक परिवेश में अब युवा वर्ग यह जानना चाहते हैं कि उनका लाइफ पार्टनर उनकी भावनाओं की कद्र करेगा या नहीं, अगर वह जीवनसाथी पर ध्यान नहीं दे रहा है, तो उसका ध्यान किस प्रकार अपनी ओर आकर्षित किया जाए। अपने इन सवालों का जवाब लेने के लिए यूथ अब इन काउंसलर्स के पास टिप्स लेने आ रहे हैं। वहीं वर्किग कपल्स इसमें ज्यादा शामिल हैं।
ज्यादातर प्रश्न पति और ससुराल के
काउंसिलिंग के दौरान लड़कियों के ज्यादातर प्रश्न होने वाले पति व ससुराल वालों से संबंधित होते हैं। वे जानना चाहती हैं कि क्या संबंधित व्यक्ति से शादी के लिए हां कहना कोई गलत फैसला तो नहीं हैं, दोनों की सोच को जितने दिनों में समझा है, उसमें सुधार के कितने अवसर हैं। उनका अपना व्यवहार ससुराल के सभी सदस्यों के साथ बेहतर तालमेल बैठा पाएगा। वहीं पढ़ी-लिखी युवतियों के बारे में लड़के भी काउंसिलिंग कर रहे हैं। जैसे शादी के बाद लाइफ पार्टनर से अच्छी ट्यूनिंग के लिए शुरुआत कैसे की जाए।
लड़कियों के कैरियर संबंधी प्रश्न
लड़के अक्सर अपनी होने वाली जीवनसंगिनी के कैरियर से संबंधित प्रश्न पूछते हैं। साथ ही युवती के बारे में यह भी पूछते हैं कि अगर वह शादी के बाद अपने कैरियर को प्राथमिकता दे तो घर एवं परिवार पर इसका क्या प्रभाव पड़ेगा। वह परिवार के साथ सामंजस्य बैठा पाएगी या नहीं, वह पूरी तरह से परिवार को अपना पाएगी या नहीं। युवक व युवती परिवार के संयुक्त होने की बात, अगर परिवार के लिए नौकरी से समझौता करना पड़े तो पार्टनर को कैसे तैयार करें ऐसी बातें काउंसलर से शेयर करते हैं।
मैंटेलिटी का पता चल जाता है
शिक्षिका दीप्ति शर्मा का कहना है कि लड़के के व्यवहार एवं नेचर को जानने के लिए प्री-मैरिज काउंसिलिंग बेहद जरूरी है। शहर में इसका ज्यादा चलन नहीं है लेकिन युवा वर्ग इसे जरूरी मानते हैं। इससे लड़के के रहन-सहन एवं मैंटेलिटी का पता चल जाता है कि वह शादी के बारे में क्या सोचता है। उसकी अपनी पत्नी से क्या अपेक्षाएं हैं, वह शादी के बाद पत्नी को कैरियर बनाने देगा या नहीं। वर्तमान में युवा वर्ग शादी का बोझ मानते हैं, काउंसिलिंग से उनके विचारों के बारे में पता लगाया जा सकता है।
तालमेल है या नहीं
24 वर्षीय योगिता दीक्षित का कहना है कि प्री-मैरिज काउंिसलिंग से लड़के के बारे में पता लगाया जा सकता है कि वह शादी के बाद उसके साथ तालमेल बैठा पाएगा या नहीं। उनकी कितनी बातों को मानेगा, उसका कैसा नेचर है, उसे कौन सी बात पसंद है और कौन सी नहीं। युवतियों के दिमाग में चलने वाले कई सारे सवालों के जवाब काउंसिलिंग के दौरान सॉल्व हो जाते हैं।
कुंडली से ज्यादा जरूरी काउंिसलिंग
मनोचिकित्सक डॉ. कमलेश उदेैनिया बताते हैं कि उनके पास महीने में चार से पांच ऐसे कपल आते हैं जो प्री-मैरिज काउंसिलिंग कराने में इंट्रस्टिड होते हैं। वर्तमान में युवा मैट्रोपोलिटन सिटीज की तरह इसे जरूरी मानने लगे हैं। उनका कहना है कि कुंडली मिलवाने से ज्यादा जरूरी है काउंसिलिंग करवाना। काउंिसलिंग करवाने से सामने वाले व्यक्ति का जीवनस्तर समझ में आता है। उनके पास अधिकतर कपल जेनेटिक डिसीज, सेक्सुअल नॉलेज एवं जीवन साथी के व्यवहार से संबंधित प्रश्न पूछते हैं। कपल्स को काउंसिलिंग के दौरान मददगार टिप्स दिए जाते हैं।