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...उसका टेण्डर ही नहीं निकला

उदयपुर. डूंगरपुर-आसपुर तहसीलों की मार्बल एक्सेज रॉयल्टी वसूलने के ठेके की प्रक्रिया में पुलिस और खान एवं भूविज्ञान विभाग ने जिस ठेकेदार के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया निविदा पेटी में उसका टेण्डर ही नहीं निकला। हाईकोर्ट के आदेश के दो माह बाद गुरूवार को टेण्डर बॉक्स खोला गया। भास्कर हमेशा सच प्रकाशित करता है, लेकिन एक अखबार (भास्कर नहीं) ने इस संबंध में कई भ्रामक खबरें प्रकाशित की है।

टेण्डर बॉक्स दोपहर 11 बजे अतिरिक्त निदेशक मुख्यालय आर.एस.हीरात, वित्त सलाहकार एवं अधीक्षण अभियंता माइनिंग तथा गोवर्धन विलास पुलिस की मौजूदगी में खोला गया। बॉक्स में चार लिफाफे निकले। एक टेण्डर बोगस पाया गया।

सर्वाधिक 4 करोड़ 50 लाख का टेण्डर तिरूपति एसोसिएट्स के नाम से रवीन्द्र सिंह शेखावत ने डाला था। इस टेण्डर के साथ एक अखबार निकला। अमानत राशि 24 लाख रुपए का डीडी नहीं था। दूसरा टेण्डर देवगंगा ट्रेडर्स का 4 करोड़ 3 लाख का था। मेवाड़ मार्बल का टेण्डर 3 करोड़ 66 लाख जबकि पार्थ नेटवर्क का टेण्डर 3 करोड़ 71 लाख का था। टेण्डर खोलने के बाद पुलिस ने बॉक्स जांच के लिए अपने कब्जे में ले लिया।

टेण्डर को लेकर विवाद
अधीक्षण माइनिंग इंजीनियर ने 30 जून 2008 को मार्बल रॉयल्टी के ठेकेदार भीमसिंह चुण्डावत के खिलाफ गोवर्धन विलास थाने में धारा 427, 353, 420 तथा 379 के तहत रिपोर्ट दर्ज कराई थी। चुण्डावत के खिलाफ आरोप लगाया गया कि उन्होंने दोपहर 3 बजे निविदा डालने का समय समाप्त होने के बाद पेटी में लिफाफा डाल दिया। टेण्डर बॉक्स खोले बगैर रॉयल्टी ठेकेदार भीमसिंह चुण्डावत के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया गया।

चालू ठेका निरस्त करने से हुआ विवाद
सरपेन्टाइन व सरपेन्टाइन चिप्स की रॉयल्टी वसूली के लिए 1 अप्रेल 2008 से 31 मार्च 2010 तक के लिए ठेका मातेश्वरी इंद्राणी फर्म का खोला गया, चुण्डावत जिसके भागीदार हैं। राजनीतिक दबाव के चलते दो माह बाद ही विभाग ने बिना किसी वजह टेण्डर निरस्त करने का प्रयास किया। उन दिनों हाईकोर्ट में अवकाश होने से चुण्डावत को सुप्रीम कोर्ट जाना पड़ा। सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान हाईकोर्ट को मातेश्वरी इंद्राणी फर्म का पक्ष सुनने के आदेश दिए। सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने दोबारा आमंत्रित टेण्डर प्रक्रिया निरस्त कर मातेश्वरी फर्म का ठेका बहाल रखा।

चुण्डावत के आरोप
मैंने मावली विधानसभा सीट से कांग्रेस का टिकट मांगा था और मेरा टिकट मिलना तय था। लेकिन कांग्रेस के ही एक बड़े नेता ने मेरा टिकट कटवाने के लिए भाजपा नेताओं से पुलिस पर दबाव डलवा कर मेरे खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज करवाया। एक समाचार पत्र (भास्कर नहीं) में मेरे खिलाफ मिथ्या एवं भ्रामक खबरें छपवाकर प्रतियां प्रत्याशी चयन समिति को भेजी गई।
-भीमसिंह चुण्डावत, भागीदार मातेश्वरी इंद्राणी फर्म

टेण्डर मामले की जांच पुलिस कर रही है लिहाजा मैं इस बारे में कुछ नहीं कहूंगा।
—आर.एस.हीरात, एडिशनल डायरेक्टर माइनिंग





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