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तुम छुपे हो कहां, हम तड़पते यहां

उदयपुर. बड़े अस्पताल में रोजाना छह घंटे संचालित होने वाले आउटडोर में तय ड्यूटी वाले सीनियर डॉक्टर्स मरीजों को आसानी से उपलब्ध नहीं होते। डॉक्टर को बताने काम धंधा छोड़कर अस्पताल पहुंचने वाले मरीज और उनके परिजन आधा दिन बाद तक ही वापस लौट पाते हैं।

संभाग के सबसे बड़े एमबी अस्पताल में रोजाना मरीजों की सुविधार्थ संचालित होने वाले आउटडोर में यह हाल नियमित हो चला है। सीनियर डॉक्टर्स की आउटडोर में सप्ताह में बमुश्किल दो दिन आउटडोर ड्यूटी निर्धारित होती है। कई नए और कई पुराने मरीज ऐसे में अस्पताल पहुंचते है।

पुराने मरीज निर्धारित दिन उसी डॉक्टर से इलाज लेने पहुंचते है जिसका इलाज मरीज शुरू से लेता आ रहा है। काम धंधे छोड़कर पहुंचने वाले मरीज और उनके परिजनों को वह डॉक्टर अस्पताल में आसानी से उपलब्ध नहीं हो पाता। आधा दिन तक भी डॉक्टर के आउटडोर में नहीं पहुंचने पर मरीज को लेकर पहुंचा उसका परिजन वार्ड और चेंबर तक डॉक्टर को तलाशते मिलता है या फिर मौजूद जूनियर डॉक्टर से ही इलाज लेकर लौट जाता है। कहीं न कहीं यदि व्यवस्था में खामी है तो सुधार किया जाएगा।
—डॉ. डीपी अग्रवाल, अधीक्षक, एमबी हॉस्पीटल

यह भी है मरीजों और परिजनों को हाल
इसके विपरीत आउटडोर में पहुंचने वाले सीनियर डॉक्टर भी कुछ समय बाद मरीजों की भीड़ के बीच से गायब हो जाते है। समय पर डॉक्टर को बताकर काम धंधे पर पहुंचने की ठान कर अस्पताल पहुंचने वाले रोगियों के परिजन भी अस्पताल से ही फोन करके धंधे की सुध लेते और नौकरी से छुट्टी लेते मिलते है।





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