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लद सकते हैं प्रॉपर्टी ब्रोकर्स के दिन

नई दिल्ली. प्रॉपर्टी की कीमतों में गिरावट की कोशिशें ब्रोकर्स पर भारी पड़ सकती हैं। दरअसल, रियल एस्टेट कंपनियां ब्रोकर के बजाय कमीशन का फायदा सीधे ग्राहकों तक पहुंचा कर कीमतें गिराने की तैयारी में हैं।

इस बीच प्रॉपर्टी बाजार के बिगड़ते हालात देखकर बड़ी तादाद में पनपे प्रॉपर्टी ब्रोकर्स में से मैदान छोड़ने वालों की संख्या भी तेजी से बढ़ रही है। फिलहाल कुछ गिने-चुने रियल एस्टेट डेवलपर्स ही ब्रोकर्स को दरकिनार कर सीधी बिक्री का रास्ता चुन रहे हैं। हालांकि, अगर कीमतें गिराने की कोशिशों में यह रणनीति सफल होती हैं तो ब्रोकर्स की मुश्किलें बढ़ सकती हैं।

गौड़ संस इंडिया लिमिटेड के डायरेक्टर मनोज गौड़ ने त्नबिजनेस भास्करत्न को बताया कि उन्होंने ब्रोकर्स के जरिए बिक्री के बजाय सीधे ग्राहकों तक पहुंचने की रणनीति अपनाई है। प्रॉपर्टी की कीमतें घटाने में यह रणनीति कारगर साबित हो सकती है। गौड़ के मुताबिक, बाकी रियल एस्टेट कंपनियों के बीच भी सीधी बिक्री का फामरूला लोकप्रिय हो रहा है।

गौरतलब है कि पिछले कुछ महीनों तक डेवलपर्स के बीच ब्रोकर्स को लुभाने और ज्यादा कमीशन देने की होड़ मची थी। प्रॉपर्टी की बिक्री पर दिए जाने वाला कमीशन आमतौर पर 2 से 5 फीसदी तक होता है। ब्रोकर्स को इससे भी ज्यादा कमीशन और महंगी कारों जैसे उपहार देने की स्कीमों का नतीजा न निकलता देख कंपनियां अब बिक्री का तरीका व नेटवर्क बदलने की सोच रही हैं।

देश की सबसे बड़ी रियल एस्टेट कंपनी डीएलएफ लिमिटेड के प्रवक्ता का कहना है कि डीएलएफ ने पहले से ही सीधी बिक्री का रास्ता अपना रखा है। कंपनी अब अपने मार्जिन में करीब 15 फीसदी तक की कमी कर मकान बेच रही है और इसका सीधा फायदा खरीदारों को ही दिया जा रहा है।

एसोटेक के एमडी संजीव श्रीवास्तव का कहना है कि ब्रोकर्स को ज्यादा कमीशन देने की होड़ और ब्रोकर नेटवर्क के जरिए बिक्री की रणनीति में तेजी से बदलाव आ रहा है। अब डेवलपर्स पहले की तरह मोटे कमीशन के बजाय सीधी बिक्री को ज्यादा तवज्जो दे रहे हैं। श्रीवास्तव के मुताबिक, अभी तक सीधी बिक्री और ब्रोकर्स के जरिए बिक्री करने वाले डेवलपर्स का अनुपात करीब 50-50 का रहता था। अब इसका झुकाव सीधी बिक्री की तरफ रहने के आसार हैं।

रियल एस्टेट कंसल्टेंट सेंचुरी 21 होम र्रिटीट के पार्टनर के.पी. शर्मा का कहना है कि बाजार के हालातों ने कंपनियों को बिक्री की रणनीति बदलने के लिए मजबूर कर दिया है। हालांकि, इस सबके बावजूद प्रॉपर्टी ब्रोकर्स और कंसल्टेंट के नेटवर्क को नजरअंदाज करना आसान नहीं होगा।





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