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बाल यातना विरोधी विधेयक को विधि मंत्रालय की मंजूरी

नई दिल्ली. विधानसभा चुनावों के बाद केंद्र सरकार लोकसभा चुनाव के लिए अपनी उपलब्धियों की पोटली मजबूत करने में जुटी है। इसी कड़ी में बच्चों के विरूद्ध अपराध रोकने के लिए महिला व बाल विकास मंत्रालय द्वारा तैयार विधेयक पर मंत्रालयों में आम सहमति बनती नजर आ रही है। विधि मंत्रालय द्वारा इस विधेयक को हरी झंडी देने के बाद अब मंत्रालय बच्चों के खिलाफ अपराध संबंधी बिल को अंतिम रूप में देने में जुट गया है।

इससे पहले विधि मंत्रालय ने नया कानून बनाने के बजाय आईपीसी की धाराओं में संशोधन का प्रस्ताव दिया था। हालांकि इसे गृहमंत्रालय ने खारिज करते हुए बच्चों की हर तरह की सुरक्षा के लिए समग्र कानून बनाए जाने पर जोर दिया था। गृहमंत्रालय के इस मंतव्य से महिला व बाल विकास मंत्रालय ने विधि मंत्रालय को अवगत कराया और नए कानून के लिए स्वीकृति देने का आग्रह किया।

निठारी कांड से सबक : उच्च पदस्थ सूत्रों का कहना है कि मंत्रालयों में आम सहमति बनने के बाद महिला व बाल विकास मंत्रालय विधेयक का प्रारूप तैयार करने के लिए विधि विशेषज्ञों की मदद ले रहा है। साथ ही, निठारी कांड और बाल शोषण की रिपोर्टे के आधार पर मिली जानकारियों को भी नए कानून में समाहित करने के लिए सलाह ली जा रही है। गौरलतब है कि मानवसंसाधन व विकास मंत्रालय के शिक्षा का अधिकार विधेयक पर केबिनेट की मुहर पहले ही लग चुकी है।





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