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Chandigarh Chandigarh जालंधर/नई दिल्ली. दिल्ली हाईकोर्ट ने भ्रष्टाचार के आरोप में रिटायर्ड लेफ्टिनेंट जनरल एसके साहनी के खिलाफ 26 नवंबर से कोर्ट मार्शल की प्रक्रिया शुरू किए जाने पर रोक लगा दी है। सेना द्वारा शुक्रवार को कोर्ट मार्शल का फैसला लिए जाने के कुछ ही घंटों बाद हाईकोर्ट ने यह अंतरिम आदेश दिया। जस्टिस एके सिकरी की अध्यक्षता वाली बेंच ने रिटायर्ड सेना अधिकारी को राहत देते हुए कहा कि इस बीच कोर्ट मार्शल की प्रक्रिया शुरू नहीं की जाएगी।
साहनी ने जनरल आफिसर कमांडिंग इन चीफ की ओर से 26 नवंबर का समन मिलने के बाद हाईकोर्ट में अपील की थी।
पहला मौका: साहनी के खिलाफ जनरल कोर्ट मार्शल (जीएसएम) की प्रक्रिया जालंधर स्थित 11 कोर मुख्यालय में शुरू की जानी थी।
यदि यह कार्यवाही शुरू हो जाती तो सेना में लेफ्टिनेंट जनरल पद पर तैनात किसी अधिकारी (रिटायर्ड एवं सर्विग) के कोर्ट मार्शल का यह पहला मौका होता। इससे पहले सेना के मेजर जनरल रैंक तक के अधिकारियों का कोर्ट मार्शल हो चुका है।
क्या है मामला :
साहनी पर जवानों के लिए 2004 में एक हजार क्विंटल अरहर की घटिया दाल समेत अन्य सूखे राशन की खरीद का आरोप है। वे एक अक्टूबर 2006 को सेना के डायरेक्टर जनरल (आपूर्ति एवं परिवहन) पद से रिटायर हुए थे। राशन (दाल) घोटाले का मामला उस वक्त सामने आया था, जब साहनी जम्मू-कश्मीर स्थित उत्तरी कमान के सैन्य राशन सप्लाई प्रमुख थे। घोटाले का खुलासा होने के बाद सेना मुख्यालय ने 2005 में मामले की कोर्ट ऑफ इनक्वायरी के आदेश दिए।
जांच में साहनी के अलावा मेजर जनरल बीपीएस मंडेर, ब्रिगेडियर एसके हांडा और ब्रिगेडियर पीएस गिल पर भी राशन खरीद के दौरान वित्तीय अनियमितता बरतने के आरोप लगे हैं। सेना के नियमों के मुताबिक वह अपने अधिकारियों के खिलाफ रिटायरमेंट के तीन साल बाद तक अनुशासनात्मक कार्रवाई कर सकती है।
‘वरिष्ठ दागी’ अधिकारियों की सूची
>> जनरल एके लाल-यौन शौषण के आरोपी
>> जनरल एसके दाहिया-फ्रोजन मीट घोटाला
>> जनरल जीआई सिंह-शराब घोटाला
>> जनरल केटीजी नंबियार-वित्तीय अनियमतताएं (सभी मेजर जनरल)
>> ब्रिगेडियर एसएस राव-फर्जी मुठभेड़
>> ब्रिगेडियर इकबाल सिंह-तहलका कांड