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बेंगलुरु
भारत के खिलाफ सात वन डे मैचों की क्रिकेट सीरीज में 0-3से पिछड़ चुके इंग्लैंड के लिए कठिनाईयां खत्म होने का नाम नहीं ले रही हैं। अब चौथे वनडे से मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंडुलकर को टीम में शामिल किए जाने से उनका सिरदर्द और बढ़ गया होगा।
मध्यक्रम के दिग्गज बल्लेबाज युवराज ¨सह और विस्फोटक ओपनर वीरेंद्र सहवाग के बल्ले की मार से इंग्लैंड के गेंदबाज पहले से ही आतंकित हैं और अब उनपर सचिन का खौफ भी छा जाएगा।
भारत और इंग्लैंड के बीच चौथा एकदिवसीय मैच २३ नवंबर को यहां के एम.चिन्नास्वामी स्टेडियम में खेला जाएगा जहां सचिन का जोरदार रिकॉर्ड है। आठ महीने के अंतराल के बाद वनडे टीम में वापसी करने वाले सचिन ने चिन्नास्वामी स्टेडियम में आठ मैचों में ४५.६२ के औसत से ३६५ रन बनाए हैं जिनमें एक शतक और दो अर्धशतक शामिल हैं।
सचिन ने इस साल अपना आखिरी वनडे मार्च में ब्रिस्बेन में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ खेला था। उसके बाद से सचिन ढाका में त्निकोणीय सीरीज कराची में एशिया कप और श्रीलंका में एकदिवसीय सीरीज से दूर रहे जबकि मौजूदा सीरीज के पहले तीन मैचों से उन्होंने विश्राम ले लिया था। उनकी वापसी पर भारतीय टीम के बल्लेबाजी क्रम में थोड़ा बदलाव आएगा। सचिन ओप¨नग में सहवाग के साथ उतरेंगे तो जोरदार फॉर्म में खेल रहे गौतम गंभीर को वन डाउन आना पड़ सकता है।
यदि टीम प्रबंधन वीरू और गंभीर की जोड़ी बरकरार रखता है तो सचिन वन डाउन खेल सकते हैं। सचिन की अंतिम एकादश में वापसी तो शत प्रतिशत तय है। इस सूरत में युवा रोहित शर्मा या सुरेश रैना में से किसी एक को बाहर बैठना पड़ सकता है क्योंकि निचले क्रम में ऑलराउंडर यूसुफ पठान बल्ले और गेंद दोनों के साथ उपयोगी प्रदर्शन कर रहे हैं। चिन्नास्वामी स्टेडियम में भारत का रिकॉर्ड काफी शानदार है। यहां उसने १४ मैचों में से नौ जीते, चार हारेऔर एक मैच में कोई परिणाम नहीं निकला है। इस मैदान पर भारत ने अपने पिछले नौ मैचों में से छह जीते हैं,दो हारे हैं और एक में कोई परिणाम नहीं निकला। सीरीज में 0-3 से पिछड़ चुके इंग्लैंड को यह मैदान राहत और उम्मीद की किरण दे सकता है क्योंकि इस मैदान पर उसने अपने दोनों मैच जीते हैं। इंग्लैंड ने 20 जनवरी १९८५ को यहां भारत को तीन विकेट से और २६ फरवरी १९९३ को ४८ रन से हराया था। इस मैदान पर दोनों देशों के बीच १५ वर्षो के लंबे अंतराल के बाद वनडे मुकाबला होने जा रहा है।