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प्रभावित हो सकती है अमेरिकी नीति

वाशिंगटननव निर्वाचित राष्ट्रपति बराक ओबामा के सलाहकार मंडल की सदस्य सोनल शाह के दक्षिणपंथी दलों से कथित संबंधों की रिपोर्टे पर कुछ भारतीय-अमेरिकियों ने यह आशंका जताई है कि इससे भारत के प्रति अमेरिकी नीतियां प्रभावित हो सकती हैं।

इस समुदाय के सदस्यों द्वारा शाह को लिखे पत्र में कहा गया है, ‘हमें आपके विहिप से निजी संबंधों की रिपोर्टे पर वास्तव में चिंता है। विहिप के सामाजिक मूल्य, राजनीतिक विचार और काम ओबामा के आशा व एकजुटता के संदेश के विपरीत हैं। हमें यह भी चिंता है कि ये संबंध सलाहकार मंडल तथा भारत व भारतीय-अमेरिकियों के प्रति नई प्रशासनिक नीतियों में आपकी भूमिका को कैसे प्रभावित करेंगे।’

इस पत्र में उनके हाल के इस बयान का स्वागत किया गया है कि विहिप और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के दृष्टिकोण से उनकी निजी राजनीति से कोई लेना-देना नहीं है।

और क्या लिखा है पत्र में

>> 2001 में आपने कभी विहिप या संघ के कार्यो से खुद को अलग घोषित नहीं किया जिससे हम निराश और दुखी हैं।

>> हम नहीं जानते कि 2002 में गुजरात के सांप्रदायिक दंगों में प्रभावित हजारों परिवारों में से किसी को आपने मदद दी या नहीं।

>> हमें यह भी नहीं पता कि आपने घृणा अभियान में आर्थिक मदद देने के दोषी किसी संगठन के खिलाफ कुछ बोला था या नहीं।

>> हाल में भाजपा के सहयोग से शासित राज्य उड़ीसा के आदिवासी ईसाइयों पर विहिप प्रायोजित हमलों की आपने निंदा की हो, हमें पता नहीं जबकि राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग ने उसे दोषी ठहराया था।





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