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नई दिल्ली. अपने 12 साल के लंबे करिअर में हमेशा परीक्षाओं से गुजरने वाले भारतीय बल्लेबाज वीवीएस लक्षमण का कहना है कि अब तक के अपने प्रदर्शन और करिअर की उपलब्धियों से संतुष्ट हूं। लक्ष्मण ने कहा कि मुझे इस बात का कोई मलाल नहीं है कि मैं टीम इंडिया का कप्तान नहीं बन पाया। लक्ष्मण ने इस बात को खारिज किया कि उनकी उपलब्धियों को ठीक ढंग से पेश नहीं किया गया।
उन्होंने कहा कि अगर ऐसा होता तो मैं अब तक 100 टेस्ट मैच नहीं खेल पाया होता। लक्ष्मण ने कहा कि मुझे इस बात की खुशी है कि मैं 100 टेस्ट मैच खेल चुका हूं और पिछले 12 साल से टीम का हिस्सा हूं। 34 साल के इस बल्लेबाज ने कहा, मेरे लिए यह महत्वपूर्ण है कि मैंने टीम को अपना पूरा योगदान दिया।
लक्ष्मण ने कहा कि हर किसी का सपना भारतीय टीम में खेलना है। जब मैंने 100 टेस्ट मैच खेलने का आंकड़ा छुआ तो वे क्षण मेरी जिंदगी के सबसे यादगार और गर्व के क्षण थे। यह पूछे जाने पर क्या इस बात का मलाल रहा कि कभी कप्तान के लिए नहीं चुने गए, तो लक्ष्मण ने कहा कि एक बार मैं कप्तान बनने के काफी करीब था जब मैं दक्षिण अफ्रीका दौरे के लिए उप कप्तान था।
मैंने कप्तानी को लेकर कभी ज्यादा ध्यान नहीं दिया। कुछ चीजें ऐसी होती हैं जिन पर आपका वश नहीं होता। लक्ष्मण ने कहा कि टीम इंडिया की कप्तानी को छोड़कर मैं इंडिया-ए टीम, रणजी टीम और दिलीप ट्रॉफी में कप्तान रह चुका हूं। लक्ष्मण ने कहा कि जो दो चीजें उन्हें खलती हैं वो हैं ज्यादा वनडे नहीं खेल पाना और साउथ अफ्रीका में हुए 2003 का विश्व कप नहीं खेल पाना।
उन्होंने कहा कि वर्ष 2004 में जब मुझे टीम में नहीं लिया गया था तो उस समय मैं वनडे और टेस्ट में अच्छा प्रदर्शन कर रहा था। ऑस्ट्रेलिया और पाकिस्तान के खिलाफ उस वक्त मेरा प्रदर्शन बेहतरीन था। लक्ष्मण ने कहा कि द्रविड़, सचिन तेंडुलकर और सौरव गांगुली ने मेरी ज्यादा से ज्यादा वनडे खेलने की इच्छा का हमेशा सम्मान किया।