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चार किताबों में चौहान ने 22 साल के अनुभव बांटे

चंडीगढ़ पिछले 22 साल के अनुभव को गुरुदेव चौहान ने कविता, व्यंग्य और लेख में समेटा है। देश और विदेश के इन अनुभवों पर आधारित उनकी चार पुस्तकों का विमोचन वीरवार को किया गया। प्रवासी लेखक गुरुदेव पिछले 4-5 सालों से कनाडा में बसे हैं। उनकी एक किताब ‘देसी मुर्ग वलैती बांग’ में कनाडावासियों के अनुशासन और भारतीयों की अनुशासनहीनता पर तीखे व्यंग्य किए गए हैं।

पंजाबी की इन चार पुस्तकों में सप्तक (काव्य संग्रह), आसपास (लेख), चश्मदीद (लेख) और देसी मुर्ग वलैती बांग (व्यंग्य) हैं। गुरुदेव बताते हैं, ‘चारों पुस्तकें आम जन-जीवन से जुड़ी हैं। कुछ में सामाजिक व आर्थिक मुद्दे भी उठाए गए हैं। लेकिन लेख आम जीवन से ही जुड़े हुए हैं।

वह बताते हैं कि कनाडावासियों के अनुशासन ने मुझे बेहद प्रभावित किया। ‘कनेडियन कुत्ते’ व्यंग्य वहां के कुत्तों के अनुशासन के बारे में बताता है। इंसान तो इंसान जहां के जानवर भी इतने अनुशासन में रहते हैं फिर वह देश तरक्की क्यों नहीं करेगा? कनाडा की न्यायपालिका, वकील और हर विभाग के कर्मचारियों के अनुशासन की भारतीय सिस्टम के साथ तुलना की गई है।

उनके काव्य संग्रह में 53 कविताएं हैं। ‘देसी मुर्ग वलैती बांग’ में 25 व्यंग्य हैं। इससे पहले भी गुरुदेव के तीन काव्य संग्रह प्रकाशित हो चुके हैं। पुस्तकों का प्रकाशन लोक गीत प्रकाशन द्वारा किया गया है। सेक्टर-46 के उत्तम रेस्टोरेंट में कायनात आर्ट्स और राइटर्स क्लब द्वारा किए गए कार्यक्रम में महिला साहित्यकार काना सिंह और कवि श्री राम अर्श नेगी भी मौजूद थे।





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