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ढूंढ़े नहीं मिल रहे हैं पंडित

चंडीगढ़ शादियों का मौसम शुरू हो चुका है, जो 9 दिसंबर तक चलेगा। लोगों को विवाह कराने के लिए पंडित नहीं मिल रहे हैं। एक पंडित के पास कई-कई विवाह कराने की जिम्मेदारी है। इनमें भी खास तौर से 23 और 29 नवंबर को पंडित ज्यादा व्यस्त हैं क्योंकि ये तारीखें विवाह के लिए अत्याधिक शुभ मानी जा रही हैं।

देवालय पूजक परिषद् के महामंत्री श्रीचंद कौशिक ने बताया कि इन दिनों पंडितों को एक-एक दिन में कई विवाह कराने की जिम्मेदारी है। इनके लिए पंडितों को महीनों पहले ही न्योते मिल गए थे। कई पंडितों ने तो कुछ स्थानों पर अपने सहयोगियों को विवाह कराने की जिम्मेदारी दे दी है।

लालद्वारा मंदिर सेक्टर-35 के मुख्य पुजारी रत्न मणि समल्टी को 23 नवंबर को सात विवाह कराने हैं। सेक्टर-18 के राधाकृष्ण मंदिर के मुख्य पुजारी पं. लाल बहादुर दूबे को 29 नवंबर को छह जोड़ों को परिणय सूत्र में बंधवाना है। इनमें से वह केवल दो की ही जिम्मेदारी निभाएंगे बाकी जगह उनके सहयोगी जाएंगे। प्राचीन शिवालय खेमपुरी के मुख्य पुजारी पं. लाखी राम भारद्वाज के पास 23 और 29 की तीन-तीन विवाह कराने की जिम्मेदारी है।

वे दोनो दिन केवल एक-एक विवाह ही कराएंगे। बाकी विवाह कराने की जिम्मेदारी उन्होंने भी अपने सहयोगी पंडितों को दे दी हैं। श्री राम मंदिर सेक्टर-47 के मुख्य पुजारी पं. मोहन लाल को 23 नवंबर की पांच विवाह कराने हैं। वह भी इस दिन एक रात में और एक दिन में दो विवाह ही करा सकेंगे। पं. चंद्रमणि को 29 नवंबर को चार विवाह कराने हैं। प्राचीन शिव मंदिर सेक्टर-18 के मुख्य पुजारी अयोध्या प्रसाद को 23 की दो विवाह कराने हैं।

9 दिसंबर से बृहस्पति मकर राशि में

9 दिसंबर की रात 11.42 बजे से 1 जनवरी 09 तक बृहस्पति मकर राशि के परम नीच अंश में चला जाएगा। इस अवधि में विवाह आदि शुभ कार्य वर्जित रहेंगे। इसके बाद फिर 11 जनवरी से बृहस्पति अस्त हो जाएगा जो 10 फरवरी को उदय होगा। बृहस्पति के डूबने पर वैसे भी अति शुभ और चिरस्थायी कार्य वर्जित माने जाते हैं। फिर 14 फरवरी से विवाह शुरू होंगे।

योजनाबद्ध तरीके से करें सारे काम

विवाह के ढेर सारे काम को देखकर घबराएं नहीं। योजनाबद्ध तरीके से काम लें। रिश्तेदारों का भी खास ध्यान रखें। उनकी आवभगत की जिम्मेदारी घर के ही किसी सदस्य को सौंपें। विवाहोत्सव से संबंधित सभी काम भी परिवार के लोगों,नजदीकी रिश्तेदारों और करीबी मित्रों को बांट दें। परिवार का मुखिया केवल को-ऑर्डिनेटर का काम करे। छोटे बच्चों को भी छोटे-छोटे काम दे दें। मसलन सभी छोटे बच्चों की देखभाल का जिम्मा दो बड़े बच्चों को दिया जा सकता है और उन्हें खेलने के लिए एक कमरा दिया जा सकता है।

बारातियों की आवभगत की जिम्मेदारी किसी ऐसे व्यक्ति को दें जो दोंनो तरफ के लोगों को जानता हो। गाड़ियों की सर्विस भी पहले ही करा लें और विवाह के दिन तो उनमें तेल की टंकी फुल रखें। एक छोटी डायरी और पेन साथ में रखें और सारा खर्च लिखते रहें।

पैसे, जेवरात और अन्य कीमती सामान जिस कमरे में रखा है उसमें घर के एक ऐसे व्यक्ति की ड्यूटी लगाएं जो वहां से किसी भी सूरत में बाहर न जाए। मोबाइल भी चर्ा्िजग के लिए खुले में न रखें। बारात में अनजान व्यक्ति देखते ही उसकी पहचान दूसरों से कराएं। सफाई का ध्यान रखें।

23 और 29 को विशेष मुहूर्त

पंडितों के अनुसार 21 नवंबर से लेकर 22, 23, 24, 29 और 30 नवंबर तथा 1 दिसंबर से लेकर 2, 7, 8 और 9 दिसंबर तक विवाह के शुभ मुहूर्त हैं। इन तारीखों को रात में भी विवाह का लग्न है और दिन में भी। 23 को रविवार और 29 को शनिवार है सो छुट्टी के कारण भी इन दोनों तारीखों पर बारात ले जाने को लोगों ने प्राथमिकता दी है। 23 नवंबर को धनु लग्न में सुबह 8.33 से 10.37 बजे तक और मीन लग्न में दोपहर 1.48 से 3.12 बजे तक तथा रात को तुला लग्न में 3.44 बजे से 6.10 बजे तक विवाह मुहूर्त हैं। 29 नवंबर को मीन लग्न में दोपहर 1.25 से 2.50 बजे तक, कन्या लग्न में रात 1.13 से सुबह 5.45 बजे तक और तुला लग्न में रात 1.19 से सुबह 5.58 बजे तक विवाह मुहूर्त हैं।





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