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इंदौर. राज्य शासन को मास्टर प्लान-2021 के लिए हाई कोर्ट इंदौर में दायर पुनर्विचार याचिका वापस लेना पड़ी है। याचिका तब लगाई गई थी जब हाईकोर्ट ने शासन से मास्टर प्लान के संबंध में प्राप्त आपत्तियों की सुनवाई कर उनका निराकरण करने को कहा था। अब शासन सभी आपत्तिकर्ताओं की सुनवाई करेगा।
शुक्रवार को प्रमुख सचिव आवास और पर्यावरण आलोक श्रीवास्तव, उपसचिव वर्षा नावलेकर, टाउन एंड कंट्री प्लानिंग की डायेरक्टर दीपाली रस्तोगी व ज्वाइंट डायरेक्टर टीएंडसीपी विजय सांवलकर जस्टिस विनय मित्तल की बेंच के सामने पेश हुए। अतिरिक्त महाधिवक्ता ने हालांकि पहले ही शासन को पुनर्विचार याचिका के बजाय आपत्तियों की सुनवाई करने का अभिमत दिया था।
लेकिन अधिकारियों ने सुनवाई के झमेले से बचने के लिए उक्त राय को अनदेखा कर एक प्रायवेट वकील के माध्यम से पुनर्विचार याचिका लगा दी। इस पर हाईकोर्ट ने गहरी नाराजगी जताते हुए कहा जब शासन के पास महाधिवक्ता और अपर महाधिवक्ता समेत कई सरकारी वकील हैं तो प्रायवेट अभिभाषक के माध्यम से पुनर्विचार याचिका क्यों दायर की गई? इसी नाराजगी को दर्शाते हुए हाईकोर्ट ने अधिकारियों को उपस्थित होने के निर्देश दिए थे।
प्रमुख सचिव और टीएंडसीपी डायरेक्टर ने मांगी बिना शर्त माफी मांगी
इस बारे में पूछने पर उपमहाधिवक्ता मनोज द्विवेदी ने बताया मास्टर प्लान के प्रकरणों में शासन की ओर से जो रिव्यू पिटीशन फाइल की गई थी, वह उचित माध्यम से फाइल न करने के कारण वापस ले ली गई है। इसके लिए प्रमुख सचिव आवास-पर्यावरण विभाग और डायरेक्टर टीएंडसीपी ने हाईकोर्ट से बिना शर्त माफी मांगी है। हाईकोर्ट के आदेश के बाद ये अधिकारी हाईकोर्ट में उपस्थित हुए थे।