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राष्ट्रपति भवन पहुंचीं कलाबाई

नई दिल्ली. अंतत: शुक्रवार को इंदौर से अपने स्वर्गीय पति के मेडल लौटाने आईं कलाबाई को राष्ट्रपति भवन में प्रवेश मिल ही गया। कलाबाई थोड़ी मायूस जरूर हुईं क्योंकि राष्ट्रपति अत्यधिक व्यस्तता के चलते उनसे मिल नहीं सकीं।

पाटील के आदेश पर उनके सचिव और उपसचिव ने उनकी दु:खभरी कहानी सुनकर तुरंत इंदौर के कलेक्टर और डिप्टी रजिस्ट्रार ऑफ कॉपरेरेशन सोसायटिज को फोन कर द्तिीय विश्व युद्ध की विधवा को तुरंत मकान दिलाने को कहा। इसके साथ ही कलाबाई को इन दोनों अधिकारियों के नाम चिट्ठी भी दी है, जो उक्त अधिकारियों को देने को कहा गया है।

भास्कर में छपी खबर पढ़कर महामहिम ने उन्हें राष्ट्रपति भवन बुलाया था लेकिन अत्यधिक व्यस्तता के चलते राष्ट्रपति कलाबाई से नहीं मिल सकीं। शुक्रवार शाम को करीब 4.15 बजे कलाबाई अपने बेटे के साथ राष्ट्रपति के निर्देशानुसार उनके सचिव डॉ. क्रिस्टी फर्नाडीस से मिलीं। करीब 45 मिनट तक उनकी समस्याओं को ध्यान से सुना। कलाबाई ने बताया कि डॉक्टर साहब ने हर समस्या का समाधान करने का आश्वासन दिया।

मकान के संबंध में जब बात बताई गई तो वे इसे सुनकर काफी गंभीर हो गए। कलाबाई ने बताया कि सारी समस्याएं सुनने के बाद डॉ. फर्नाडीस ने उपसचिव फैज अहमद किदवई को बुलाकर सारी समस्या से अवगत कराया और इंदौर के कलेक्टर और जमीन मामले से संबंधित अधिकारियों को तुरंत फोन कर स्थिति से अवगत कराने और मामले की पूरी जानकारी उन्हें जल्द से जल्द देने को कहा। इसके बाद उपसचिव किदवई ने भी कलाबाई और सूरज से काफी समय तक मामले की जानकारी ली। इसके बाद किदवई ने इंदौर के कलेक्टर राकेश श्रीवास्तव और डिप्टी रिजिस्ट्रार ऑप कॉपरेरेशन सोसाइटीज अंबरिश वैद को फोन किया।

सूरज ने बताया कि एक अधिकारी से तो किदवई की बात हो पाई लेकिन एक किसी बैठक में व्यस्त थे। वे यह नहीं बता पाए कि किदवई की किससे बात हुई और किससे नहीं। इसके साथ ही किदवई ने उक्त अधिकारियों के नाम लिखी चिट्ठी उन्हें दी है जिसे वे इंदौर जाकर अधिकारियों को देंगे।

पेंशन के बारे में पूछने पर सूरज ने बताया कि पेंशन से संबंधित सारे कागजात उन्होंने ले लिए हैं। डॉ.क्रिस्टी फर्नाडीज और फैज अहमद किदवाई ने उन्हें आश्वासन दिया है कि इस मामले को भी शीघ्र से शीघ्र हल कर लिया जाएगा।

खुशी ज्यादा और गम कम
राष्ट्रपति भवन से निकलने के बाद जब कलाबाई ने कहा, अब हमें अपना घर मिल जाएगा। अब हमें दर-दर की ठोकरें खाने नहीं पड़ेंगे। अब हमें मेडल भी लौटाने नहीं पड़ेंगे। हमारा सारा काम जल्द ही हो जाएगा, ऐसा साहब ने कहा है। करीब एक घंटे 30 मिनट की इस मुलाकात को कलाबाई ने बहुत ही अच्छा बताया। उन्होंने हमारी बात ध्यान से सुनी और सब कुछ ठीक करने की बात कही है। राष्ट्रपति से मुलाकात नहीं हो पाने पर उन्होंने कहा, पता लगा है कि काफी व्यस्त हैं। अगर एक मिनट के लिए भी मिल जाती तो मैं अमर हो जाती।

क्या है मामला
द्वितीय विश्व युद्ध में संयुक्त सेना की ओर से ईरान और इराक के खिलाफ लड़ने और राष्ट्रपति पदक से स?मानित ज्ञानेंद्र कुमार यादव की विधवा कलाबाई पति के पेंशन और अपनी जमान वापस पाने के लिए कई वर्षो से संघर्ष कर रही हैं।





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