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छोटी तरंगों के लिए बड़ा मंथन

जयपुर. आम जीवन में बड़ा स्थान रखने वाली छोटी तरंगों (माइक्रोवेव्ज) के क्षेत्र में काम करने वाले दुनियाभर के दिग्गज शुक्रवार को जयपुर में जुटे। 24 नवंबर तक माइक्रोवेव इलेक्ट्रॉनिक्स से जुड़े प्रोफेसर, प्रोफेशनल, रिसर्च स्कॉलर, उद्योगपति और वैज्ञानिक इस क्षेत्र में होने वाले विकास को दुनिया के सामने रखेंगे।

मोबाइल, टेलीविजन, ब्लू टूथ, वाई-फाई, ओवन, मेडिकल ट्रीटमेंट जैसे माध्यमों में माइक्रोवेव के प्रयोग और हमारे जीवन से बढ़ी इनकी निकटता के कारण यह इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस काफी महत्वपूर्ण सिद्ध होने वाली है। महारानी कॉलेज में शुक्रवार शाम एक रंगारंग कार्यक्रम के साथ इंटरनेशनल माइक्रोवेव इलेक्ट्रॉनिक्स कॉन्फ्रेंस शुरू हुई। मुख्य अतिथि भारत के लूनर मिशन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे इसरो के साइंटिस्ट डॉ. सुरेंद्र पाल थे। यह कॉन्फ्रेंस राजस्थान यूनिवर्सिटी के माइक्रोवेव रिसर्च ग्रुप की ओर से आयोजित की जा रही है।

इसमें अमेरिका स्थित इंस्टीट्यूशन ऑफ इलेक्ट्रॉनिक्स एंड इलेक्ट्रिकल इंजीनियर्स (आईईईई) व देश दुनिया के लगभग 20 संगठन सहयोग कर रहे हैं। इसके सभी सत्र विश्वविद्यालय स्थित विज्ञान भवन, सीनेट हॉल, रामास्वामी ऑडिटोरियम में होंगे।

शुक्रवार को दिनभर विज्ञान भवन में अमेरिका से आए प्रो. डब्ल्यू. एम. बार्नर का एक ट्यूटोरियल सेशन हुआ जिसमें 35 वैज्ञानिकों सहित कई विद्यार्थियों ने भी भाग लिया। शनिवार से इस कॉन्फ्रेंस में रिमोट सेंसिंग, इलेक्ट्रॉनिक्स, माइक्रोवेव के साइड इफैक्ट्स और एनर्जी जैसे महत्वपूर्ण टॉपिक्स सहित कम्युनिकेशन इंजीनियरिंग को डवलप करने पर चर्चा की जाएंगी। इसमें भारत के सभी राज्यों के अलावा यूएसए, ईरान, मलेशिया, पोलैंड, नाइजीरिया, ऑस्ट्रेलिया, बांग्लादेश, फ्रांस और टर्की से आए लगभग 320 लोग हिस्सा ले रहे हैं।

डॉ. पाल करेंगे यंग स्कॉलर्स को प्रमोट
दुनिया भर में माइक्रोवेव इलेक्ट्रॉनिक्स में यंग स्कॉलर्स का रुझान कम हो रहा है। इस पर डॉ. पाल ने कहा कि अगर विद्यार्थी माइक्रोवेव में आगे शोध करना चाहते हैं तो वह इसरो से हरसंभव सहायता के लिए प्रयास करेंगे। साथ ही उन्होंने प्रोफेसर्स को सुझाव दिया कि वह विद्यार्थियों को माइक्रोवेव पढ़ाने के तरीकों में भी सुधार करें। आईईईई से जुड़े विजय के नायर ने भी कहा कि यंग स्कॉलर्स को इस क्षेत्र में लाने और डवलपमेंट्स को बढ़ाने के लिए आईईईई के साथ मिलकर तीन साल का कार्यक्रम चलाया जा रहा है।

चुनावोंे के कारण भाग नहीं ले सके प्रतिभागी
इस कॉन्फ्रेंस में हिस्सा लेने के लिए सभी राज्यों से कई प्रोफेसर आने वाले थे, लेकिन कुछ राज्यों में चुनावों में ड्यूटी लगा दिए जाने से लगभग 20 लोगों ने अब आने में असमर्थता जाहिर की है।





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