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जयपुर. डीग-कुम्हेर क्षेत्र से कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ रहे विश्वेन्द्र सिंह को भाजपा से निष्कासित कर दिया गया है। वे कुछ दिन पहले ही टिकट नहीं मिलने से नाराज होकर कांग्रेस में शामिल हो गए थे।
उनकी पत्नी दिव्यासिंह अभी भी भाजपा में हैं और राज्य कर्मचारी चयन सेवा बोर्ड की अध्यक्ष हैं। पार्टी ने पूर्व मंत्री किरोड़ीलाल मीणा सहित दस विधायकों, तीन पूर्व विधायकों, एक जिला प्रमुख, एक प्रधान और एक जिला कार्यकारिणी सदस्य पर भी अनुशासनात्मक कार्रवाई की है। भाजपा चुनाव संचालन समिति के संयोजक एवं सांसद रामदास अग्रवाल ने शुक्रवार को बताया कि 17 प्रमुख लोगों को अनुशासनहीनता का दोषी मानते 6 साल के लिए पार्टी से निष्कासित कर दिया है।
इन विधायकों को दिखाया बाहर का रास्ता : डॉ. किरोड़ीलाल मीणा, लक्ष्मी बारूपाल, गोविंदराम चौहान (मेघवाल), जीवाराम चौधरी, अजरुनसिंह देवड़ा, अजरुन जीनगर, के. डी. बाबर, कन्हैयालाल मीणा, राकेश मेघवाल और दाताराम गुर्जर। पूर्व विधायकों में रामेश्वर भाटी, हीरासिंह चौहान, बद्री गुरुजी। जिला प्रमुख कन्हैयालाल धाकड़, प्रधान नरेन्द्र और उदयपुरवाटी के जिला कार्यकारिणी सदस्य रामनिवास सैनी।
सत्रह जनों पर ही कार्रवाई क्यों? : विधानसभा चुनाव में भाजपा के करीब 80 बागी प्रत्याशी मैदान में हैं। इनमें से लगभग 56 प्रत्याशी ऐसे हैं जो अपने-अपने इलाकों में अथवा राज्य स्तर पर अपना प्रभाव रखते हैं। इनसे पार्टी को ज्यादा नुकसान की आशंका है। अभी जिन 17 प्रमुख लोगों पर कार्रवाई की गई है, उनमें ज्यादातर मुख्यमंत्री वसुंधराराजे के विरोधी खेमे से जुड़े हैं। इन लोगों पर कार्रवाई इसलिए की गई है ताकि बाकी लोगों में भय हो जाए और वे अधिकृत प्रत्याशी के पक्ष में मैदान से हट जाएं। बाकी का फैसला बाद में : सांसद रामदास अग्रवाल ने बताया कि चुनाव मैदान में डटे कुछ प्रत्याशियों ने रिटायर होने की इच्छा जाहिर की है। इसलिए उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई फिलहाल रोकी गई है। यदि वे 22 नवंबर की शाम तक रिटायर हो जाते हैं तो उन पर कार्रवाई नहीं होगी।