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देश के मौजूदा प्रशासनिक ढांचे में आमूल-चूल परिवर्तन तभी संभव है जब हम बिल्कुल नए सिरे से इस बारे में सोचें और हमारी औपनिवेशिकवाद की मानसिकता को झटक दें। भारत जैसी जटिल प्रशासनिक प्रक्रिया और व्यवस्था किसी देश में नहीं है और इसी अफसरशाही को सरल एवं जवाबदेह बनाना ही मेरा मुख्य उद्देश्य है।
प्रशासनिक सुधार आयोग के अध्यक्ष और कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री श्री वीरप्पा मोइली ने भोपाल प्रवास के दौरान भास्कर से विशेष बातचीत में कहा कि प्रशासनिक सुधार की प्रक्रिया भर्ती के समय से ही लागू होना चाहिए जिससे सिर्फ अच्छे अफसर ही सेवा में आ सकें। श्री मोइली प्रशासन के हर स्तर पर व्याप्त भ्रष्टाचार से बेहद चिंतित हैं। श्री मोइली पिछले तीन वर्षो से आयोग के अध्यक्ष के नाते देश की अफसरशाही में क्या और कैसे सुधार लाए जा सकते हैं इस पर बड़ा काम कर रहे हैं। उनके आयोग को 13 विषयों पर लगभग 16 रिपोर्ट्स देना है जिसमें से कई रिपोर्ट्स सरकार को पेश कर दी हैं और कुछ पर अभी काम चल रहा है। मोरारजी देसाई आयोग के बाद श्री मोइली अब करीब 40-50 वषों बाद प्रशासनिक ढांचे में सुधार पर काम कर रहे हैं।
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता श्री मोइली का मानना है कि यदि अफसरों को जवाबदेह बनाना है तो संविधान में दिया गया प्रतिरक्षण (इम्युनिटी) खत्म करना होगा भले ही उसके लिए संविधान की धारा 309 और 311 को खत्म करना पड़े। इसके चलते उनकी निरंकुशता पर भी कुछ नियंत्रण हो सकेगा।
उन्होंने कहा आयोग की तरफ से उनकी अगली रिपोर्ट सरकारी सेवाओं में सुधार में इन बातों और मुद्दों को वे समाविष्ट कर रहे हैं जिनसे इस सेवाओं में सुधार हो सके। किसी जमाने में ‘स्टील फ्रेम’ (लोहे का ढांचा) मानी जाने वाली देश की प्रशासनिक सेवाएं क्या अब पूरी तरह चरमरा चुकी हैं और ‘एल्यूमिनियम फ्रेम’ से भी अधिक नाजुक हो चुकी है? इस सवाल पर श्री मोइली का कहना था कि अब ‘स्टील फ्रेम’ जैसी कोई बात इसमें नहीं रही है और अफसरशाही में चारों ओर फैला भयंकर भ्रष्टाचार, राजनीतिक दखलंदाजी के कारण प्रशासन तंत्र बिल्कुल बैठ गया है जो सभी के लिए चिंता का विषय बना हुआ है।
अच्छे लोग अब प्रशासनिक अधिकारी बनना पसंद नहीं करते, वे आईआईएम/आईआईटी या और कहीं जाना पसंद करते हैं। इसके लिए अब 10+2 के बाद ही प्रशासनिक सेवाओं हेतु अलग अभ्यासक्रम की आवश्यकता है। जब देश में आईसीएस के जरिये अफसर आते थे तब लगभग अच्छे ही लोग इस सम्मानजनक सेवा में मिलते थे जो अब नहीं दिखते, श्री मोइली ने कहा।
उन्हांेने कहा, जब तक हम यह सब खत्म करने की बात नहीं करते तब तक नई व्यवस्था नहीं गढ़ी जा सकती। करीब 16 खंडों वाली उनकी रिपोर्ट का काम अगले वर्ष फरवरी-मार्च तक पूरा होगा उसके बाद वह कैबिनेट में मंजूरी हेतु भेजी जाएगी। मोइली आयोग का कार्यकाल सिर्फ एक साल का था पर उसे इस वर्ष के अंत तक बढ़ाया गया है। उन्होंने माना कि आमूलाग्र बदलाव के सुझावों को प्रशासनिक अधिकारियों की ओर से विरोध होने की संभावना को नकारा नहीं जा सकता।