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हिंदू नहीं हो सकता उग्रवादी

रायपुर. पुरी पीठाधीश्वर जगदगुरु शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती मानते हैं हिंदू उग्रवादी नहीं हो सकते। ये चेतनाविहीन, रोजी-रोटी के लिए संघर्ष करने वाले होते हैं। जिनका लक्ष्य ऊंचा और नीति घटिया होती है वे ही यह काम करते हैं।

शंकराचार्य प्रदेश के विभिन्न शहरों में धर्मसभा, सत्संग में शामिल होने दस दिनी दौरे पर यहां आए हैं। शुक्रवार को पत्रकारों से चर्चा में उन्होने कहा कि प्रज्ञा सिंह उग्रवादी है या नहीं यह कहना मुश्किल है। मैं उसका पक्षधर भी नहीं हूं, लेकिन उसे संदेह के आधार पर जितना प्रताड़ित किया जा रहा है, उतना संगीन आरोपियों को भी नहीं किया जाता। अंग्रेजों की नजर में सुभाष-गांधी भी उग्रवादी थे। राष्ट्रभक्ति क्या है यह समझने की जरूरत है। विश्व की बात तो एक तरफ रही, हिंदू भारत में भी न्याय पाने की स्थिति में नहीं हैं।

उनके साथ इतना अन्याय न हो कि वे उग्रवाद की तरफ आगे बढ़ें। शंकराचार्य ने राजनीतिक दलों को जमकर आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा कि आजादी के बाद जितना देश का पतन हुआ उतना पहले नहीं हुआ। हिंदुस्तान में रीढ़विहीन राजनीति हो रही है। विश्वास मत पाने कुचक्र रचे जाते हैं।

विदेशी षड़यंत्रकारियों को दोस्त बनाकर काम कर रहे भारत के राजनेता और दल हिंदुओं के आदर्श और अस्त्वि पर कुठाराघात करने पर तुले हैं। ये लोग, प्रांतीयता व भाषा के नाम पर अराजकता फैलाने वालों को दंड देने के बजाय दुर्भावनावश काम कर रहे हैं। हिंदू उग्रवाद शब्द देने वाले राष्ट्रदोही हैं।

सत्तारूढ़ दल ने भगवान राम के अस्तित्व को नकारा है। ये भारतीय कहने लायक हैं कि नहीं यह सोचने की जरूरत है। देश में एक भी ऐसा धार्मिक-सामाजिक संगठन नहीं जो निरंकुश राजनेताओं और राजनीतिक दलों पर काबू पाए। मानवता के पक्षधरों को व्यूह रचना कर भारत को नष्ट होने से बचाने आगे आना चाहिए।





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