|
News
Chhattisgarh
Raipur Raipur रायपुर. डीडीनगर में चल रहे श्रीमद् भागवत महापुराण में आज स्वामी निश्चलानंद सरस्वती के शिष्य पं. नंदकुमार चौबे ने कहा कि सत्य के समान कोई पुण्य नहीं है और असत्य के समान कोई पाप नहीं है।
उन्होंने कहा- आज उल्टी गंगा बह रही है। समाज चाहे कितना ही शिक्षित या पढ़ा-लिखा हो, खुद को सभ्य एवं भद्र कहता हो, वहीं व्यक्ति अपने निजी स्वार्थ के लिए झूठ बोलता है। आज बच्चे से लेकर बूढ़े तक झूठ बोलने से नहीं कतराते।
पं. चौबे ने कहा कि मनुष्य अपने जीवन को एक मशीन की तरह उपयोग करता है। यदि वह थोड़ा भी समय सतकर्म के लिए नहीं देगा, तो ज्ञान की प्राप्ति कैसे होगी? इसके लिए मां-बाप की दिनचर्या ही दोषी हैं। आज जितने भी सतकर्म हो रहे हैं, सभी रजोगुण व तमोगुण को बढ़ावा देने वाले हैं। समाज में व्याप्त विसंगतियों के बारे में उन्होंने कहा कि आज छोटे छोटे पदों के लिए भी आठवीं कक्षा उत्तीर्ण होने की योग्यता निश्चित की गई है, लेकिन सौ करोड़ जनता पर शासन करने वाले राजनेताओं के लिए कोई शैक्षणिक योग्यता की आवश्यकता नहीं है। ऐसा क्यों? क्या राजनेता बनने के लिए बाहुबली, सजायाफ्ता या फरार घोषित आदि डिग्री ही काफी होती है। ऐसे में देश व समाज के विकास की क्या उम्मीद की जा सकती है। आज देश व समाज के विकास के लिए शासक और प्रशासक का शिक्षित होना जरूरी है।
प्राचीन काल में राजकुमारों को शिक्षा के लिए गुरु के आश्रम में रहना पड़ता था। स्वयं प्रभु राम भी वशिष्ठ के आश्रम में शिक्षा ग्रहण करने गए थे। आचार्य चौबे ने कहा कि जिस वस्तु का अधिक प्रयोग किया जाता है, उसकी कमी हो जाती है। जैसे अधिक बोलने से वाणी की शक्ति खत्म होती है। उसी तरह अधिक समय तक देखने से आंखों की शक्ति क्षीण होती है। इसलिए इंद्रियों का दमन करना चाहिए जिससे इंद्रिय शक्ति का अधिक संचार हो।
इसीलिए तो राजा सगर के साठ हजार पुत्र इंद्र द्वारा हरण किए गए घोड़े को खोजते हुए कपिल मुनि के आश्रम में गए और वहां मुनि के आंखें खोलते ही जलकर राख हो गए। कहने का तात्पर्य है कि संयमित दृष्टि से आंखों में शक्ति का संचार होता है। इसलिए हर व्यक्ति को अपनी इंद्रियों को संयमित रखना चाहिए। 22 नवंबर को धूमधाम से श्रीकृष्ण रुकमणि विवाह महोत्सव मनाया जाएगा। कथा 25 नवंबर तक होगी।