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भोपाल. केंद्र सरकार ने केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों में कार्यरत अधिकारियों के वेतन में 50 से 300 फीसदी की बढ़ोतरी की घोषणा गुरुवार को की। बढ़ा हुआ वेतन एक जनवरी, 2007 से लागू होगा। केंद्र सरकार द्वारा की गई घोषणा का लाभ भोपाल में मौजूद इन उपक्रमों के 38 कार्यालयों और कारखानों के अधिकारियों को मिलेगा। केंद्र सरकार ने वेतन पुनरीक्षण के लिए गठित की गई जगन्नाथ राव कमेटी की अनुशंसाओं को माना है, लेकिन अधिकारी इन अनुशंसाओं से खुश नहीं हें, जबकि उनके बेसिक वेतन में चार गुना की बढ़ोतरी हुई है।
सार्वजनिक उपक्रमों के अधिकारियों को वर्तमान में आठ हजार 600 रुपए से लेकर 27 हजार 750 रुपए बेसिक वेतन मिल रहा है, जबकि जगन्नाथ राव कमेटी ने इस बेसिक वेतन में 50 से लेकर 300 फीसदी की सिफारिश की है।
भोपाल में अधिकारियों द्वारा की जा रही गणना के अनुसार नवरत्न कंपनियों के अधिकारियों को नए वेतनमान के अनुसार कम से कम 80 हजार रुपए से लेकर दो लाख 58 हजार रुपए तक मिलेंगे। यह गणना एक जनवरी, 2007 से लागू वेतनमान के आधार पर अन्य भत्तों को जोड़ने के बाद होगी। भारत हैवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड (भेल) में न्यूनतम बेसिक वेतनमान 10 हजार 750 रुपए है, वहीं साउथ ईस्टर्न कोल कंपनी में आठ हजार 600 रुपए है। इस प्रकार नवरत्न कंपनियों को छोड़कर अन्य कंपनियों के अधिकारियों को करीब 50 हजार से लेकर एक लाख 25 हजार रुपए तक मिलेंगे।
नए वेतनमान में सार्वजनिक उपक्रम की नवरत्न कंपनी के प्रबंध निदेशक को इस समय बेसिक वेतन के साथ इंक्रीमेंट की राशि मिलाकर कुल 31 हजार 500 रुपए मिल रहे हैं। नए वेतनमान में यह राशि कुल 2 लाख 58 हजार रुपए हो जाएगी। इसी प्रकार निदेशक को अभी कुल 30 हजार 950 रुपए मिल रहे हैं, जो बढ़कर लगभग दो लाख रुपए तक होंगे, वहीं सबसे छोटे अधिकारी ई-वन ग्रेड को 16 हजार 750 रुपए मिल रहे हैं, जो अब करीब 80 हजार रुपए हो जाएंगे।
जगन्नाथ राव कमेटी की अनुशंसाएं तो केंद्र सरकार ने मान लीं, लेकिन इसमें नवरत्न कंपनियों का ग्रेड ‘ए’ प्लस खत्म कर दिया। इससे अधिकारियों को मिलने वाली सुविधाओं में कमी हो जाएगी।
-एमपी अग्रवाल, वरिष्ठ उपमहाप्रबंधक, भेल
केंद्र सरकार ने छोटे अधिकारियों के पे-स्केल को नीचे लाकर वेतनमान के अंतर को बढ़ा दिया, जबकि बड़े अधिकारियों के पे-स्केल को पुराने स्थान पर ही रखा है। इससे बड़े और छोटे अधिकारियों के वेतनमान के बीच अंतर और ज्यादा बढ़ गया है। केंद्रीय भारी उद्योग मंत्री संतोष मोहन देव ने सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों के अधिकारियों को जो आश्वासन दिया था, उसे पूरा नहीं किया।
-जेआर प्रजापति, महासचिव, अधिकारी एसो. भेल