|
मुंबई. बहुचर्चित राहुल राज मुठभेड़ कांड में शनिवार को उस वक्त नया मोड़ आ गया जब पुलिस ने फोरेंसिक रिपोर्ट के हवाले से दावा किया कि उसे गोली पास से नहीं बल्कि 4-5 मीटर दूर से मारी गई थी।
मुंबई पुलिस कमिश्नर हसन गफूर को यह रिपोर्ट शुक्रवार को सौंपी गई। इस रिपोर्ट में राहुल के चेहरे पर गनपावडर (बारुद) पाये जाने से भी इनकार किया गया है। फोरेंसिक लैब की रिपोर्ट में कहा गया है कि राहुल को 303 राइफल से तीन और 9 एमएम पिस्तौल से दो गोली मारी गई थी।
क्या है मामला?
बिहार के राहुल राज(25) को 27 अक्टूबर को कुर्ला क्षेत्र के एसीपी मोहम्मद जावेद के नेतृत्व में पुलिस की टीम ने कुर्ला बैल बाजार इलाके में एनकाउंटर में मार गिराया था। राहुल पर बस को अगवा करने और एक यात्री मनोज भगत को गोली मारने का आरोप है। इसके अलावा पुलिस ने यह भी दावा किया था कि राहुल एमएनएस अध्यक्ष राज ठाकरे की हत्या करने के मकसद से मुंबई आया था।
यूं बढ़ा विवाद
राहुल राज मामले ने उस वक्त तूल पकड़ लिया, जब बिहार के प्रमुख नेताओं ने इस मसले पर प्रधानमंत्री से मुलाकात की। मुंबई पुलिस पर राहुल को फर्जी एनकाउंटर में मार गिराने का आरोप लग ही रहे थे कि उसका पोस्टमार्टम करने वाले जे.जे. अस्पताल के चार सदस्यीय दल के डॉ. बी.जी. चिखलकर ने सनसनीखेज खुलासा करते हुए कहा कि राहुल के चेहरे पर गनपावडर (बारुद) मिला है, जिसका सीधा अर्थ है कि उसे गोली बेहद करीब यानी महज दो फीट की दूरी से मारी गई थी। डॉ. चिखलकर के इस बयान के बाद मुंबई पुलिस के साथ-साथ महाराष्ट्र सरकार भी सवालों के घेरे में आ गई। कुछ ही देर बाद इस बयान का प्रशासनिक स्तर पर खंडन कर दिया गया।
नहीं लिया गया घायल का बयान : राहुल राज मुठभेड़ के चश्मदीद गवाह मनोज भगत का बयान अब तक नहीं लिया गया है। भगत के पैर में गोली लगी थी। वह अब भी राजावाड़ी अस्पताल में भरती है। इस पूरे प्रकरण की अलग से जांच कर रहे महाराष्ट्र के मुख्य सचिव जॉनी जोसेफ ने एक बार उनका बयान लेने की कोशिश की, परंतु भगत के अस्वस्थ होने के कारण सफलता नहीं मिली।
सरकार का मन बदला : गोली का जवाब गोली से देने संबंधी बयान देने वाले महाराष्ट्र के उप मुख्यमंत्री आर.आर. पाटिल अब राहुल के परिजनों को दो लाख रुपए का मुआवजा देना चाहते हैं। इस प्रस्ताव का उनके सहयोगी मंत्री ही विरोध कर रहे हैं। इसके बावजूद पाटील का कहना है कि हम राहुल के परिजनों को आर्थिक मदद करना चाहते हैं क्योंकि उनकी कोई गलती नहीं थी। माना जा रहा है कि पाटील ने यह कदम लोकनिर्माण मंत्री छगन भुजबल और राकांपा से जुड़े उत्तर भारतीय नेताओं के दबाव में लिया है।