|
नई दिल्ली. पूर्व भारतीय कप्तान राहुल द्रविड़ ने भारतीय क्रिकेट में चल रही सीनियर और युवा खिलाड़ियों की बहस को दरकिनार करते हुए यहां कहा कि आप अच्छा प्रदर्शन करते रहिए इस बहस का कोई सवाल ही नहीं रहेगा।
द्रविड़ ने स्थानीय एक आंग्ल अखबार द्वारा आयोजित लीडरशीप कांफ्रेंस में यह बात कही। सीनियर और युवा खिलाड़ियों को लेकर चल रही बहस कोई नई बात नहीं है।ऐसा पहले भी होता रहा है।द्रविड़ ने कहा कि मेरा मानना है कि आपका प्रदर्शन हीआपका सबसे बड़ा मापदंड है। आप जब तक अच्छा खेलते रहेंगे सीनियर व जूनियर का कोई सवाल नहीं रहेगा।
पूर्व कप्तान सौरव गांगुली और अनिल कुंबले के हाल में लिए गए संन्यास का जिक्र करते हुए द्रविड़ ने कहा ‘ मेरा मानना है कि उन्होंने ऐसी बहस या आलोचनाओं से विचलित होकर संन्यास नहीं लिया। दोनों महान खिलाड़ी हैं और उन्होंने भारतीय क्रिकेट के लिए अभूतपूर्व योगदान दिया है। संन्यास का फैसला उनका खुद का फैसला था।’
कुंबले ने ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ हाल की सीरीज में दिल्ली में तीसरे टेस्ट के बाद संन्यास ले लिया था जबकि गांगुली ने नागपुर में चौथे और आखिरी टेस्ट के बाद क्रिकेट को अलविदा कह दिया। भारतीय टीम के ‘फेबुलस फाइब’के इन दो सदस्यों की विदाई के बाद द्रविड़ को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। द्रविड़ का ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ सीरीज में खासा निराशाजनक प्रदर्शन रहा था जबकि सचिन और वीवीएस लक्ष्मण ने इस सीरीज में प्रभावशाली प्रदर्शन किया था।
आलोचनाओं से निपटना आता है : द्रविड़ की फॉर्म खराब चल रही है और उन पर भी सवाल उठ रहे हैं। गांगुली और कुंबले के बाद अब द्रविड़ का नम्बर बताया जा रहा है,लेकिन द्रविड़ इन आलोचनाओं से कतई विचलित नहीं दिखाई दे रहे थे। उन्होंने कहा ‘ इस तरह की बहस और बातें खेल का ही एक हिस्सा है। यह देखना चयनकर्ताओं का काम है कि किसे चुनना है और किसे नहीं चुनना है।द्रविड़ ने कहा ‘मैं ऐसी बातों को लम्बे समय से देख रहा हूं और इनका अभ्यस्त हो चुका हूं। मैंने ऐसी आलोचनाओं से निपटना सीख लिया है।’
आईपीएल से बदलाव आया क्रिकेट में : द्रविड़ ने सम्मेलन में ‘पैसा,खेल भावना और क्रिकेट’ का दबाव विषय पर बोलते हुए कहा ‘पिछले डेढ़ वर्षो में क्रिकेट में काफी बदलाव आया है। खासकर इंडियन प्रीमियर लीग ने क्रिकेट के स्वरूप में क्रांतिकारी परिवर्तन किया है। युवा खिलाड़ियों को नए मौके और धन मिला है।’उन्होंने माना कि ट्वेंटी-२क् की लोकप्रियता का असर टेस्ट पर पड़ सकता है लेकिन टेस्ट अब भी सर्वोच्च है और कोई भी युवा टेस्ट सीरीज को ही देखते हुए बड़ा होता है। वैसे यह प्रशासकों को देखना होगा कि भविष्य में वे खेल के तीनों स्वरूपों को किस नजरिए से लेते हैं।