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रोड रेज के शिकार हैं पुणे के पुलिसकर्मी

पुणे. आमतौर पर लोगों के साथ र्दुव्‍यवहार का आरोप झेलने वाली पुलिस महाराष्ट्र के इस शहर में लोगों के बुरे बर्ताव का शिकार हो रही है। पिछले तीन माह के दौरान पुलिसकर्मियों के साथ र्दुव्‍यवहार के 38 मामले सामने आए हैं। रोड रेज अर्थात वाहनचालकों द्वारा की जाने वाली हिंसा की हालत यह है कि जनवरी से अब तक कुल 61 पुलिसकर्मियों की पिटाई हुई है और इस आरोप में 180 लोग गिरफ्तार हुए हैं।

पुलिस कमिश्नर सत्यपाल सिंह के मुताबिक देश में यातायात के नियमों का उल्लंघन करने वालों द्वारा पुलिसकर्मियों पर हमले की यह सर्वाधिक संख्या है। उन्होंने बताया कि ऐसे अपराधों को अंजाम देने वाले अमूमन पढ़े-लिखे लोग होते हैं। इनमें खासकर विद्यार्थी और सॉफ्टवेयर उद्योगों के कर्मचारी शामिल हैं।

अनोखी सजा : हमलों की बढ़ती संख्या को देखते हुए पुणो पुलिस ने भी कार्रवाई करने का निर्णय लिया है। गत माह ट्रैफिक कांस्टेबल की पिटाई करने वाले एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर को पांच दिन तक रोज दो घंटे के लिए ट्रैफिक पुलिसकर्मी की ड्यूटी निभाने की सजा दी गई।

गिरफ्तारी का अधिकार : संयुक्त पुलिस आयुक्त राजेंद्र सोनवणो ने बताया कि भारतीय मोटर वाहन अधिनियम, 1988 की धारा 202 के तहत पुलिस बिना किसी वारंट के नियम तोड़ने के दोषी चालकों को गिरफ्तार कर सकती है। इस अधिनियम के उपयोग से वाहनचालकों को यातायात के नियम तोड़ने से हतोत्साहित किया जा सकेगा। हमलों का मुकाबला करने के लिए पुलिसकर्मियों को मजबूत बेटन और फाइबर की छड़ियां भी दी गई है।





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