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Astrology
Astro Speak Astro Speak ग्रह-नक्षत्र. ब्रम्हाण्ड के समस्त घटनाक्रम ग्रह पुंजों एवं आकाशीय नक्षत्र पिंडों के प्रभाव से ही होते रहे हैं। सभी नक्षत्र एवं ग्रह अपने स्वभाव, प्रकृति एवं बलाबल के अनुसार अपने प्रभाव से सृष्टि के चर-अचर को प्रभावित करते हैं।
वर्तमान परिप्रेक्ष्य में जबकि चार राज्यों में विधानसभा चुनाव होने जा रहे हैं, ग्रहों के प्रभाव को जानने की जिज्ञासा उठना स्वाभाविक है। वर्तमान युग पूर्ण रूप से प्रजातांत्रिक प्रणाली द्वारा चयन का है। ऐसे में प्रजा के मनोभाव, उनकी क्रियाशीलता, विवेक एवं ज्ञानशक्ति का रूझान ग्रहों के स्वाभाविक गुणों पर ही आधारित रहेगा।
प्रजातांत्रिक ग्रहों पर विचार करें तो शनि पूर्ण रूप से प्रजातांत्रिक ग्रह है। यह मकर एवं कुंभ राशि, जो कि कालपुरुष के पैरों पर आती है, का अधिपति तथा पुष्य, अनुराधा एवं उत्तराभाद्रपद नक्षत्र का दशानाथ है। एक राशि पर तीस महीने तक रहकर उपस्थिति, दृष्टि एवं शत्रु व मित्र के अनुसार फल देता है। इसी ग्रह में यह भी शक्ति है कि यह राजा को रंक एवं रंक को राजा बनाने में समर्थ है। वर्तमान में 27 नवंबर, २क्क्८ को मध्यप्रदेश में चुनाव होने जा रहे हैं। 230 सीटों के लिए भाजपा, कांग्रेस, सपा, बसपा व भाजश एवं सैकड़ों निर्दलीय अपने भाग्य आजमा रहे हैं, जिसमें 230 की विजय सुनिश्चित है। साथ ही अधिकतर लोग निराश ही होंगे।
इस दिन अनुराधा नक्षत्र है, जिसका दशानाथ भी शनि ही है। केवल शनि ही नहीं अपितु सूर्य-अनुराधा 3, मंगल अनुराधा 4, बुध अनुराधा 3 इस तरह चार ग्रह अनुराधा नक्षत्र वृश्चिक राशि पर ही रहेंगे, जिसका स्वामी शनि है। शेष ग्रहों में बृहस्पति उत्तराषाढ़ा 1 धनु राशि में, शुक्र पूर्वाषाढ़ा 4 धनु में, शनि उत्तरा फाल्गुनी 1 सिंह में तथा राहु श्रवण 3 मकर में भ्रमण कर रहे हैं। ऐसे में शनि ही सत्ता निर्धारण करने में सक्षम जान पड़ता है। प्रत्याशियों की राशियों पर विचार करें तो भाजपा एवं कांग्रेस प्रत्याशियों में सर्वाधिक प्रत्याशी कुंभ राशि, जिसका स्वामी शनि है, मैदान में उतारे गए हैं, जिसमें 11.7 प्रतिशत भाजपा ने तथा 19.5 प्रतिशत कांग्रेस ने उतारे हैं।
शनि की मित्र राशि वृषभ एवं उच्च राशि तुला राशि से संबंधित भाजपा के 14.7 प्रतिशत तथा कांग्रेस के 9.5 प्रतिशत उम्मीदवार मैदान में है। यही स्थिति अन्यान्य राजनीतिक दलों की भी है। ऐसे में शनि को छोड़ विचार करना सही मार्गदर्शन नहीं दिला सकता। शनि ही सत्ता पर अधिकार करेगा, यह भी स्पष्ट दिखाई दे रहा है।
ज्योतिष में फल कथन की अनेकानेक पद्धतियां हैं, जिसमें प्राचीनतम तथा सूक्ष्म पद्धति नक्षत्र पर आधारित है। नक्षत्र विज्ञान की अतिप्राचीनता इसी से स्पष्ट हो जाती है कि ऋग्वेद में इसके बारे में विस्तृत उल्लेख आता है। पहले जहां नौ ग्रहों पर विचार किया जाता रहा है, वहीं अब 27 नक्षत्रों, उनके अधिपति, उनके उपनक्षत्रों एवं भावाधिपतियों पर भी विचार करना होगा। जिन प्रत्याशियों का जन्म नक्षत्र से अनुराधा नक्षत्र तीसरे, पांचवे, सातवें, बारहवें, चौदहवें, सोलहवें, इक्कीसवें, तेइसवें व पच्चीसवें स्थान पर आ रहा है, उस प्रत्याशी के लिए चुनाव मैदान में जीत हासिल करना आसान नहीं होगा। यदि अन्यान्य ग्रहों में बृहस्पति, शुक्र, शनि, राहु का नक्षत्र चार भी उपरोक्त के अनुसार हुए तो जीत मुश्किल होगी।
उसी प्रकार जिन प्रत्याशियों के जन्म नक्षत्र से अनुराधा नक्षत्र छठा, आठवां, नौवां, पंद्रहवां, सत्रहवां, अठारहवां, चौबीसवां, छब्बीसवां व सत्ताइसवां हैं, ऐसे जातक जो शुक्र ग्रह की अनुकूलता भी प्राप्त कर रहे हैं, वे विजय प्राप्त कर सकेंगे। जिन उम्मीदवारों का जन्म नक्षत्र अश्विनी, कृत्तिका, आश्लेषा, मघा, उत्तरा फाल्गुनी, अनुराधा, ज्येष्ठा, मूल, उत्तराषाढ़ा व रेवती है तथा उनकी वर्तमान दशाधिपति, अंतर्दशाधिपति आदि भ्रमणशील हैं या अपनी शुभ दृष्टि दे रहे हैं या स्थान विशेष से संबंध स्थापित कर रहे हैं, ऐसे जातकों की जीत होना सहज हो जाएगा।
मुख्य रूप से दोनों ही पार्टियां सरकार बनाने का दम-खम रखेंगी, किंतु दोनों को ही स्पष्टता की दरकार रहेगी। ऐसी स्थिति में उमा भारती की कुंडली कुंभ लग्न की है। केतु में चंद्र का अंतर चल रहा है, जो 27 नवंबर,2008 तक रहेगा। यह समय सहयोगी नहीं जान पड़ता। उत्तरा भाद्रपद नक्षत्र में जन्मी उमा के लिए अभी मंजिल दूर ही दिखाई दे रही है तथापि अपनी संघर्षशीलता, उत्तम व्यक्तित्व के कारण विधानसभा में अपनी उपस्थिति दर्ज कराने में सक्षम हो सकती हैं।
दिल्ली, राजस्थान व छत्तीसगढ़ के चुनाव परिणाम भी चौंकाने वाले रहेंगे। मुख्य पार्टियों के अलावा छोटी पार्टियां अपना वर्चस्व कायम कर सत्ता में हस्तक्षेप करने के लिए तत्पर होंगी तथा बड़ी पार्टियों को समर्थन की दरकार रहेगी, ऐसा जान पड़ता है। समय के गर्भ में सबकुछ, आने वाले समय की सभी घटनाएं समाहित रहती हैं और समय ही हमें उन घटनाओं के संकेत प्रदान करता है। उन्ही संकेतों के आधार पर यह विवेचन किया गया है, जो भावी समय के गर्भ में सन्निहित है।