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स्वप्नदर्शी उद्यमी की स्वप्निल यात्रा

busienssबिजनेस के क्षेत्र से जुड़े लोगों के लिए सर रिचर्ड ब्रान्सन अनजाना नाम नहीं है। दुनियाभर में बड़ी तेजी से लोकप्रिय होते वर्जिन ब्रांड के जनक ब्रान्सन ही हैं। विभिन्न साहसिक खेलों में हाथ आजमाने वाले और छोटे पर्दे पर भी अक्सर दिखाई देने वाले ‘स्टाइलिश’ ब्रान्सन खुद ही ब्रांड बन चुके हैं। अपने व अपने बिजनेस के ब्रांड बनने की कहानी कहने के लिए उन्होंने कलम को माध्यम चुना और लिख दी ‘बिजनेस स्ट्रिप्ड बेअर’।

अरबपतियों की उद्यमशीलता पर लिखी जाने वाली पुस्तकों की श्रंखला में यह ताजा कड़ी है। इससे पहले अरबपति निवेशक वॉरेन बफेट की किताब ‘द स्नो बॉल : वॉरेन बफेट एंड द बिजनेस ऑफ लाइफ’ आई थी, लेकिन दोनों पुस्तकों में अंतर यह है कि जहां वॉरेन बफेट की किताब उनकी जीवनी के रूप में है जिसे उन्होंने स्वयं नहीं लिखा है, जबकि ‘बिजनेस स्ट्रिप्ड बेअर’ को खुद एक लेखक के तौर पर ब्रान्सन ने लिखा है। लेकिन यह आत्मकथा नहीं है, क्योंकि इसमें उनके अनुभव व संस्मरण उतनी बेबाकी के साथ नहीं आए हैं जितने कि एक आत्मकथा में आते हैं। बीच-बीच में यह किताब ‘मोटिवेशनल बुक’ की तरह भी बर्ताव करती नजर आती है।

‘बिजनेस स्ट्रिप्ड बेअर’ मुख्य तौर पर सात अध्यायों में बंटी हुई है। छोटी-छोटी कंपनियों को मिलाकर विशालकाय साम्राज्य खड़ा करने वाले ब्रान्सन अपनी सफलता का राज पहले ही अध्याय में खोल देते हैं जब वे कहते हैं, ‘अच्छे लोगों को चुनो और उन्हें स्वतंत्र छोड़ दो। वे खुद ही आपकी कंपनी को ऊंचाइयों पर पहुंचा देंगे।’ वे सेल्फ एम्पावरमेंट में यकीन करते हैं। यही वजह है कि वर्जिन ग्रुप को उन्होंने 350 से भी अधिक छोटी-छोटी कंपनियों में बांट रखा है और उसकी जिम्मेदारी कई लोगों को सौंप रखी है।

उनका मानना है कि छोटी कंपनियां ठहराव की समस्या से बेहतर ढंग से निपट सकती हैं। इससे कर्मचारी भी हमेशा ऊर्जावान और हरदम कुछ नया कर गुजरने को तैयार रहते हैं। इस किताब में ब्रान्सन एक बार नहीं, कई बार यह एहसास दिलाने का प्रयास करते हैं कि उद्यमशीलता की ताकत में उन्हें कितना भरोसा है। नेतृत्व, ब्रांड और सामाजिक उत्तरदायित्व जैसे अध्यायांे के माध्यम से वे अपने इस विश्वास को सिद्ध करते हैं।

‘गलतियों से सीखो’ अध्याय में ब्रान्सन अपनी व्यावसायिक जिंदगी के उदाहरण उसी तरह पेश करते हैं, जैसे अक्सर मैनेजमेंट गुरु अपनी व्यक्तित्व विकास की किताबों में लिखते हैं। वे कहते हैं, ‘व्यापार में एक चीज तय है। आप और आपके आस-पास रहने वाले गलती तो करेंगे ही। ...आपको अपने लोगों पर विश्वास करना होगा और उनकी व खुद अपनी भी गलतियों से सीखना होगा। गलतियों के लिए दूसरों को जिम्मेदार ठहराने का कोई मतलब नहीं है।’

सवाल यह उठ सकता है कि आखिर किसी को यह किताब क्यों पढ़नी चाहिए? क्या ब्रान्सन की व्यावसायिक रणनीतियों को समझने के लिए इसे पढ़ा जाए या फिर उनकी जिंदगी के वे सबक सीखने के लिए जिनसे वे इतने सफल उद्यमी बनकर उभरे? दरअसल, यह पूरी किताब एक ऐसे आईने के रूप में सामने आती है जिसमें हर व्यक्ति ब्रान्सन के बहाने अपनी तस्वीर देख सकता है। उसे कहीं न कहीं ब्रान्सन के रूप में अपनी छवि नजर आएगी। आत्मविश्वासी, साहसिक निर्णय लेना वाला यह उद्यमी शुरुआत में एक औसत छात्र ही रहा और कई बार विफल भी हुआ। हममें से हर सफल व्यक्ति की भी अमूमन यही कहानी होती है और अपने अक्स को किसी और में तलाशने की कवायद अक्सर दिलचस्प ही रहती है।





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