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इंदौर. हमेशा हाशिये में रहने वाले कार्यकर्ताओं की ताकत का अंदाजा शायद हम यूं नहीं लगा पाएं तो जरा इस पर नजर डालिए। इंदौर जिले के नौ विधानसभा क्षेत्र में दोनों प्रमुख पार्टियों के लगभग पचास हजार कार्यकर्ता हैं।
कार्यकर्ताओं के भी अलग-अलग वर्ग होते हैं। कुछ सक्रिय, कुछ समर्पित, कुछ माहौल देखकर आने वाले और कुछ देखा-देखी चुनाव में जुड़ने वाले होते हैं। कुछ कार्यकर्ता तो चुनावी टिकट घोषित होने के बाद जाति या सामाजिक स्तर पर जुड़ जाते हैं मगर इस बार जो खास वर्ग है वह है युवा कार्यकर्ताओं का।
नियमित काम : चुनाव कार्यालय पहुंचकर दिनभर का काम समझना। साथियों को फोन कर या गाड़ी भेजकर इकट्ठा करना। फिर प्रचार सामग्री लेकर निकलना।
जब आम सभा होना हो - एक-एक कार्यकर्ता पर कम से कम 50 लोगों को सभा में लाने की जिम्मेदारी होती है। पार्टी के डंडे -झंडे, बैनर आदि का काम। इसके साथ ही सभा विफल न हो इस पर नजर रखे।
चुनाव जीतने पर- जश्न मानना, जुलूस निकालने की तैयारी करना, विजेता प्रत्याशी के जिंदाबाद नारे लगाते हुए चलना। तरह-तरह के नारे लगाकर माहौल बनाना।
..और हार जाए तब- हारे हुए प्रत्याशी का हौंसला बढ़ाना। फिर उसे चुनाव के लिए तैयार करना। अगले पांच साल तक सक्रिय रहकर खुद की पार्टी में मौजूदगी दर्ज करवाते रहना।
एक बूथ, 25 यूथ- भाजपा और कांग्रेस जैसे बड़े दलों ने एक बूथ पर 10 से 25 यूथ लगा रखे हैं। प्रचार खत्म होते ही इन्हें मतदान के पहले घर-घर जाकर मतदाता पर्ची बांटने, प्रत्याशी के लिए वोट मांगने और अपने पहचान वाले मतदाताओं को बूथ तक लाकर मतदान कराने और घर तक छुड़वाने की जिम्मेदारी भी उठाना पड़ती है।
पार्टी के रंग में रमे ये सच्चे कार्यकर्ता
जगदीश सुकवासिया उर्फ पार्षद ये वो सज्जन हैं, जिनका सिर से लेकर पैर कांग्रेस के रंग में रमा हुआ है। जिंसी में रहने वाले ये शख्स चुनाव के दौरान इंदौर-तीन के कांग्रेस प्रत्याशी अश्विन जोशी का समर्थन करते हैं। बकायदा अपनी नौकरी को एक महीने का विराम देकर जनसंपर्क के दौरान कांग्रेस का झंडा लेकर आगे-आगे चलते हैं। चुनाव की मुनादी बजने से लेकर परिणाम आने तक कांग्रेस के तीन रंगों वाला कुर्ता, टोपी पहनकर आगे-आगे रहते हैं। सुबह आठ बजे ही जनसंपर्क वाले क्षेत्र में तैनात हो जाते हैं। घर से लाने और छोड़ने की व्यवस्था भी कार्यकर्ता करते हैं।