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इंदौर. तीखे तेवर लेकर चुनावी मैदान में उतरे पूर्व मंत्री सुरेश सेठ ने किस रणनीति के तहत अपनी ही पार्टी के विधायकों को कटघरे में खड़ा कर दिया, सादगी और बिना भीड़भाड़ के अपना प्रचार करने वाले इस बुजुर्ग कांग्रेसी नेता से ऐसे ही सवालों पर खास बात।
ब टिकट घोषित हुआ था तो सबसे ज्यादा शोर विधानसभा क्षेत्र क्रमांक 2 के उम्मीदवारी को लेकर ही हुआ था लेकिन यह शोर बीते कुछ दिनों से थमा-थमा सा दिख रहा है। तेजतर्रार और शहर के लिए अड़ने वाले नेता के रूप में पहचाने जाने वाले सुरेश सेठ खामोश क्यों हैं?
श्री सेठ का जवाब सीधा है। वे कहते हैं मैं कोई भौंकने वाला कुत्ता नहीं हूं। जब जरूरत होता है तब बोलता हूं। शनिवार को नंदानगर की एक-दो-तीन नंबर गलियों में गुंडागर्दी के खिलाफ आवाज बुलंद करते हुए महू उम्मीदवार कैलाश विजयवर्गीय और विरोधी प्रत्याशी रमेश मेंदोला के खिलाफ प्रचार में उनका वह तेवर भी दिखा। हालांकि उस वक्त आसपास खड़े लोगों ने ताली नहीं बजाई। चुपचाप गलियारों से खड़े होकर सुनते रहे।
श्री सेठ कहते हैं हर मंच अलग होता है। आज मुझे एक नेशनल मीडिया में बुलाया गया था। वहां वे यह देखना चाहते थे कि इस उम्र में मैं बोल सकता हूं कि नहीं। वहां विरोधी प्रत्याशी के खिलाफ बोलने का कोई औचित्य नहीं है। ऐसे ही अन्य वैचारिक मंच थे जहां मैंने अपने विचार रखे। वैसे भी चुनाव बैलेट पेपर पर लड़ना चाहिए, प्रत्याशी से नहीं।
अब तक मैंने जितने चुनाव लड़े सभी विरोधी प्रत्याशी से मेरे अच्छे संबंध रहे। जहां तक बात अपने ही विधायकों को आड़े हाथों लेने की है तो अन्याय के खिलाफ लड़ना मेरा सिद्धांत है। मंत्री रहने के दौरान मैंने अपने ही सरकार में इस्तीफा दे दिया था। महापौर और आईडीए अध्यक्ष के खिलाफ बोलकर क्या कुछ हो जाएगा? उन्होंने कुछ काम किया और मैंने उसे मान लिया। बात कार्यकर्ताओं की है तो भीड़ की क्या जरूरत है? जिस मोहल्ले में जाता हूं, वहीं के लोग जुड़ जाते हैं।
आप तो अपने ही विरोधी को सुधरने पर विधायक बनाने का आश्वासन दे रहे हैं? पिता के उम्र का होने के कारण यहमेरा कत्र्तव्य है। क्या आप जीतेंगे? इस सवाल पर वे मुस्कुराकर बोले- मैं चुनाव जीतने के लिए ही लड़ता हूं।
एक साल मंत्री और एक साल महापौर रहे श्री सेठ के दिमाग में भी शहर विकास के लिए उनका एजेंडा साफ है। वे कहते हैं सरकार किसी की भी बने। विधायक बना तो शहर के कई रुके हुए काम करवा दूंगा। इसके लिए ज्यादा समय नहीं चाहिए।