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वाकई सातवें आसमान पर हूं

इंदौर. soni मेरे दादा का भी साथी, मेरे बेटे का भी दोस्त थका नहीं है अब तक देखो, ये बूढ़ा बरगद पेड़।

जी हां, सभी को आश्रय देने वाली, बरगद के पेड़ के समान मजबूत यह महिला है सोनी बाई। पत्रकार कॉलोनी निवासी सोनी बाई नानेरिया 23 नवंबर को 98 वर्ष पूर्ण कर रही हैं। साकेत क्लब में शाम 6 बजे हीरक महोत्सव का आयोजन किया जा रहा है, जिसमें हास्य कवि ओम व्यास मां पर लिखी कविताएं सुनाएंगे।

जीवनकाल में सात पीढ़ियां देख सोनी बाई अब आठवीं पीढ़ी देखने की तमन्ना रखती हैं। दादा ससुर व ससुर की पीढ़ी के साथ बेटे, पोते, परपोते व उनके बच्चे (बेटी के पोते) शामिल हैं। बेटे-बहू सहित परिवार के 25 सदस्य साथ ही रहते हैं। रविवार को कुटुम्ब के छह सौ लोग इकट्ठा होंगे। वे कहती हैं आज भी मुझमें बहुत सामथ्र्य है, बस आंखों ने धोखा दे दिया। यदि ये इतनी कमजोर नहीं होतीं तो मैं आज भी सारे काम कर सकती। वे बताती हैं मैंने कभी जीवन में कोई बड़ी चीज की चाहत नहीं रखी, बस दिन-रात अपना फर्ज निभाती रही।

यही वजह है भगवान ने मुझे सब कुछ दिया। मैं बहुत खुश हूं कि मेरे बेटे, पोते व परपोते अपने परिवार के साथ मिलकर मेरा जन्मदिन इतनी धूमधाम से मना रहे हैं। 98 सालों के लंबे सफर में कई पल आए, जिन्होंने मुझे खुशी दी लेकिन सबसे ज्यादा खुशी तब होती है जब पोते अतुल को मजाक में मारती हूं और वह दूसरा गाल आगे करता हुआ कहता है- बाई एक और चांटा मारो न, प्लीज।

जब कभी पता चलता है कि फलां बेटे ने अपने माता-पिता को वृद्धाश्रम में डाल दिया या र्दुव्‍यवहार किया तो बहुत तकलीफ होती है। मैं उन्हें सिर्फ यही कहना चाहूंगी कि तुम जैसा व्यवहार करोगे, तुम्हारे बच्चे व पोते भी वैसा ही करेंगे।





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