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अभय की निराली सोच

abhअभय इंडस्ट्री के प्रतिष्ठित देओल परिवार से हैं। इसके बावजूद उन्होंने अपना रास्ता तय करने के लिए स्वयं कड़ी मेहनत की है। वह ऐसी फिल्में करना पसंद करते हैं जो उन्हें बतौर अभिनेता चुनौती देती हों।

अभय देओल उन कलाकारों में से नहीं हैं जो वर्ष में चार फिल्में कर स्वयं को चर्चाओं में बनाए रखें। इसके विपरीत वह ऐसी फिल्में करने में रुचि रखते हैं जो प्रत्येक उम्रवय के दर्शकों द्वारा सराही जाएं।

‘सोचा न था,’ ‘हनीमून ट्रेवल्स प्रा. लि.’ और ‘मनोरमा सिक्स फीट अंडर’ इसका सशक्त उदाहरण भी हैं। कम फिल्में करने के बावजूद संभवत: अपने सही चयन के कारण ही वह अलग पहचान बनाने में सफल रहे हैं। अब उनकी नई फिल्म ‘ओए लकी लकी ओए’ प्रदर्शन को तैयार है, जिसमें वह शातिर चोर बंटी का किरदार निभाते नजर आएंगे।

वह कहते हैं, ‘सभी अपने काम को लेकर याद किए जाने के ख्वाहिशमंद रहते हैं। मैं भी उनसे अलग नहीं हूं। मेरे विचार से मन को भाने व संतुष्टि देने वाले काम को ही करना चाहिए। शायद यही एक वजह है कि मैंने बड़े बैनर और नाम के पीछे भागने के बजाय छोटे बजट की सार्थक फिल्में करने को तरजीह दी।’

यही वजह है कि देओल सरनेम के उनके लिए मायने कुछ अलग हैं। वह अपने लिए इस नाम को एक प्रेशर और चुनौती के तौर पर लेते हैं। वह कहते हैं, ‘जब मैंने इंडस्ट्री में प्रवेश किया था तो घर के स्तर पर मुझ पर एक प्रेशर था।

परिवार के सदस्यों को थोड़ी झिझक थी कि मैं स्थापित मानकों पर खरा उतर भी पाऊंगा या नहीं? तब की तुलना में आज मैं काफी रिलेक्स महसूस करता हूं। मेरे प्रति कुछ पूर्वाग्रह भी थे, लेकिन मैं समझता हूं कि आज वहीं मेरे लिए लाभ का सौदा बन चुके हैं।’





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